सौ से ज्यादा परिवार किराये के कमरों में रह रहे हैं। सौ से ज्यादा लोग तंबुओं में परिवार के साथ रहने पर मजबूर हैं। सैंज घाटी के प्रभावित गुमत राम ने कहा कि खुशियां मनाने के लिए घर ही नहीं बचा है।
आपदा के जख्म हरे, सराज में दिवाली पर भी सन्नाटा
इस बार मानसून में आई आपदा ने सराज घाटी की दीपावली की खुशियां छीन ली हैं। जहां हर वर्ष धनतेरस और दीपावली पर बाजारों में रौनक दिखती थी, वहीं इस बार बगस्याड़, थुनाग और जंजैहली जैसे प्रमुख बाजार सूने नजर आ रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के चेहरों पर उदासी साफ झलक रही है। थुनाग बाजार जो सराज का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, आपदा में बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दुकानदार अभी तक अपनी दुकानें ठीक से दोबारा नहीं सजा पाए हैं। कई दुकानें तो अब भी मलबे के ढेर में तब्दील हैं।
दीपावली से पहले जिस बाजार में खरीदारों की भीड़ रहती थी, वहां इस बार वीरानी छाई हुई है। स्थानीय निवासी तेज सिंह, सतीश कुमार, नारायण, पीतांबर और रितिक ठाकुर बताते हैं कि इस बार दीपावली मनाने का कोई उत्साह नहीं है। जब घर ही उजड़ गए हैं तो रोशनी कैसे करें। उनका कहना है कि बहुत से लोग अब भी आपदा आश्रय स्थलों में रह रहे हैं और अपने गांव नहीं लौट पाए हैं। इस बार सराज के कई गांवों में न तो दीप जलेंगे न मिठाइयां बंटेंगी। लोग रिश्तेदारों के घर या अस्थायी शिविरों में रहकर जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की जद्दोजहद में हैं। प्रशासन राहत पहुंचाने में जुटा है, लेकिन पर्व की भावना लौटने में समय लगेगा। सराज की इस दीपावली में रंग, मिठास और रोशनी की जगह एक गहरी चुप्पी है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में जीवन दोबारा पटरी पर लौटेगा लेकिन इस साल की दिवाली याद बन कर रह जाएगी। एक ऐसी दिवाली जो आपदा की छाया में फीकी पड़ गई।
70 परिवारों के पास नहीं बचे घर
उपमंडल निरमंड में बरसात के दौरान करीब 70 परिवार आपदा में अपने घर गंवा चुके हैं। इनमें से 37 परिवार अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के पास रह रहे हैं। 10 परिवार अपने दूसरे घरों में और 12 परिवार किराये के कमरों में रह रहे हैं। एक परिवार अस्थायी टेंट, छह परिवार पंचायत भवन में, दो परिवार स्कूल भवन में, एक परिवार महिला मंडल भवन में और एक सरकारी भवन में जीवन यापन कर रहा है। ये सभी परिवार दिवाली अपने घरों में नहीं मना पाएंगे।
आपदा प्रभावित लोगों की दिवाली फीकी
हिमाचल में इस मानसून सीजन में भारी बारिश, आपदा से 4881 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। प्रदेश में 454 लोगों की जान चली गई, जबकि 674 पक्के, 1062 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। 50 लोग अभी भी लापता हैं। 2,376 पक्के और 5,118 कच्चे मकानों को नुकसान हुआ है। 496 दुकानें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा 7,399 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। ऐसे में आपदा प्रभावित हजारों लोगों की दिवाली इस बार फीकी ही रहेगी। घरों में न दीप जलेंगे, न बंटेगी मिठाई।