अदालत के पत्नी ने माना कि सर्विस के दौरान पति अकाउंट में पैसे भेजता था। यह भी माना कि उनका एक जॉइंट अकाउंट है और पति की पेंशन उसी अकाउंट में आती है। वह पंचकूला में काम कर रही है। महीने में 10 से 15 हजार रुपये कमाती हैं और 2020 से अलग रह रही हैं। पति के खिलाफ फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की है।
अदालत ने फैसले में बताया है कि आवेदक ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जो प्रतिवादी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि कर सके। दूसरी ओर, प्रतिवादी पर अपने बेटे और अन्य परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी है। पत्नी ने पहले ही अदालत में तलाक की याचिका दायर की है, जो दर्शाता है कि वह प्रतिवादी के साथ रहने को तैयार नहीं है। यह सभी तथ्य दर्शाते हैं कि आवेदक ने प्रतिवादी के खिलाफ अपने आरोपों को साबित नहीं किया है।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने मनोहर सिंह बनाम द्रौपती देवी 2021 मामले में यह टिप्पणी की है कि यदि पत्नी घरेलू हिंसा के तथ्य को साबित करने में विफल रही है तो वह किसी भी भरण-पोषण की हकदार नहीं है। अधिनियम का मुख्य उद्देश्य और प्रयोजन केवल घरेलू हिंसा के कारण पत्नी को राहत देना है। घरेलू हिंसा के तहत भरण-पोषण तीन आधारों शारीरिक दुर्व्यवहार, मानसिक दुर्व्यवहार,और आर्थिक दुर्व्यवहार पर दिया जा सकता है। इसलिए यह न्यायालय पाता है कि आवेदक घरेलू हिंसा के आधार पर कथित राहत पाने का हकदार नहीं है। उपरोक्त बिंदुओं पर चर्चा और निष्कर्षों के मद्देनजर आवेदन स्वीकार करने योग्य नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।