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Himachal CM: कुछ कंपनियों के एकाधिकार पर राहुल की चिंताओं का मुख्यमंत्री सुक्खू ने किया समर्थन

Sun, 10 Nov 2024 03:05 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कंपनियों के एकाधिकार के गंभीर मुद्दे को स्पष्ट और साहसिक रूप में देश के समक्ष रखा है जोकि हर नागरिक की चिंता को उजागर करता है। 
 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा बाजार पर कुछ कंपनियों के एकाधिकार को लेकर जताई गई चिंताओं का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की यह चिंता केवल आलोचना नहीं है, बल्कि एक बड़े और आवश्यक परिवर्तन की मांग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा हमेशा सभी नागरिकों को समान अवसर उपलब्ध करवाने, संसाधनों का समुचित वितरण सुनिश्चित करने और देश की आर्थिक संरचना में जनहित को सर्वोपरि रखने की रही है। 

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उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस गंभीर मुद्दे को स्पष्ट और साहसिक रूप में देश के समक्ष रखा है जोकि हर नागरिक की चिंता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि बाजार में यदि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होगी तो कीमतें भी नियंत्रित रहेंगी और उपभोक्ताओं को भी बेहतर सेवाएं और उत्पाद मिलेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा कुछ बड़े कॉरपोरेट समूहों के एकाधिकार को लेकर उठाए गए सवाल देश के हर नागरिक के कल्याण के लिए आवश्यक हैं। राहुल गांधी ने बड़ी कंपनियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से करते हुए कहा है कि इस प्रकार का एकाधिकार देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। सुक्खू ने कहा कि राहुल गांधी देश की आवाज हैं। उनकी चिंताएं हर नागरिक के हित में हैं। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए देश की जनता के हित में नीति निर्माण करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी के विचार और सुझाव देश के सभी नागरिकों को सजग करने वाले हैं। 
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यदि केंद्र सरकार वास्तव में जनहित में कार्य करना चाहती है तो इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और आर्थिक असमानता को खत्म करने के लिए ठोस नीतियां अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मुद्दों पर देशभर में चर्चा होनी चाहिए ताकि आम नागरिक अपने अधिकारों और हितों के प्रति सजग रहें और सभी को समान रूप से आर्थिक सशक्तिकरण के लाभ प्राप्त हो सकें।

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