जैसे ही पानी का स्तर 1645 फीट पर आएगा, डिफ्लेक्शन अपने आप सामान्य हो जाएगी। फिलहाल सिंचाई के लिए पानी की सप्लाई की मांग कम है। इसलिए जलस्तर धीरे-धीरे सामान्य की ओर बढ़ रहा है। झील से बड़े पैमाने पर गाद निकालने के लिए बीबीएमबी ने राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रक्रिया तेज कर दी है। फाइल तैयार की जा रही है। इसे अगले एक महीने में विधानसभा से मंजूरी दिलाने की तैयारी है। इसके बाद झील के महत्वपूर्ण हिस्सों से गाद हटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। बीबीएमबी के चीफ इंजीनियर सीपी सिंह के अनुसार झील में जमा होने वाले पानी का इस समय पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल नहीं हो पा रहा, लेकिन इससे बांध की कार्यप्रणाली या मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ रहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गाद का बांध पर कोई दुष्प्रभाव नहीं है और तकनीकी दृष्टि से बांध बिल्कुल सुरक्षित है। बीबीएमबी ने बताया कि झील में गाद की समस्या का स्थायी समाधान किया जा रहा है। केंद्र सरकार के साथ मिलकर सेडिमेंट यूटिलाइजेशन (गाद उपयोग) पर नई पॉलिसी तैयार की जा रही है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए बीबीएमबी ने पॉलिसी का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है, जिसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। गोबिंद सागर झील के लुहणू क्षेत्र से गाद निकालने के लिए बीबीएमबी ने एक साल पहले ही पूरा टेंडर तैयार कर लिया है। प्रदेश सरकार की ओर से पॉलिसी न होने के कारण इसे अब तक जारी नहीं किया गया। बीबीएमबी ने हाल ही में टेक्निकल कोऑर्डिनेशन मीटिंग (टीसीएम) भी की है। मीटिंग में राज्य सरकार ने बीबीएमबी को फाइल तैयार कर भेजने को कहा, जिससे इसे मंजूरी प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा सके।