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हिमाचल विधानसभा सत्र: 1190 आंगनबाड़ी केंद्रों में नहीं बिजली की सुविधा, शांडिल ने लिखित उत्तर में दी जानकारी

Tue, 25 Aug 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 प्रश्नकाल के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।  प्रदेश में वर्तमान में 18,925 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें 4,24,362 बच्चे पंजीकृत हैं।
 
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डाॅ. धनी राम शांडिल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के 1190 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। प्रदेश में वर्तमान में 18,925 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें 4,24,362 बच्चे पंजीकृत हैं। मंत्री ने बताया कि प्रदेश के कुल आंगनबाड़ी केंद्रों में से 8,417 सरकारी भवनों और 10,508 निजी भवनों में संचालित हो रहे हैं। 31 जुलाई 2026 तक राज्य में 18,549 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 17,990 सहायिकाएं कार्यरत थीं। लिखित जवाब में बताया गया कि सरकारी भवनों में चल रहे 8,417 केंद्रों में से 5,378 में बिजली कनेक्शन उपलब्ध हैं। 1,849 केंद्रों में बिजली की सुविधा है लेकिन कनेक्शन नहीं है।

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निजी भवनों के 10,508 केंद्रों में से 5,676 में मीटर बिजली कनेक्शन हैं। 4,826 केंद्रों में बिजली की सुविधा उपलब्ध है पर कनेक्शन नहीं है। केवल छह निजी केंद्रों में ही बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकारी भवनों में संचालित कुल 8,417 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 8,268 में पाइप कनेक्शन से पेयजल उपलब्ध है। शेष 149 भवनों में अन्य स्रोतों से पेयजल की व्यवस्था है। वर्तमान में कोई भी सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र पेयजल सुविधा से वंचित नहीं है। निजी भवनों में संचालित 10,508 केंद्रों में से 10,452 में पाइप कनेक्शन से पेयजल उपलब्ध है। शेष 56 भवनों में अन्य स्रोतों से पेयजल की व्यवस्था है। सरकार ने निजी भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद पड़ी सरकारी पाठशालाओं में स्थानांतरित करने के संबंध में कहा कि शिक्षा विभाग से अभी कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। प्रस्ताव मिलने पर विभाग उस पर विचार करेगा।

कम नामांकन, अधिक खर्च ने बंद करवाईं प्राइमरी स्कूलों की खेलकूद प्रतियोगिताएं
 प्रदेश सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में होने वाली खेलकूद प्रतियोगिताओं को बंद करने के फैसले का विधानसभा में बचाव किया है। शिक्षा मंत्री की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि प्राथमिक स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का अंतिम आयोजन शैक्षणिक सत्र 2024-25 में ब्लॉक स्तर पर किया गया था। इसके बाद विभिन्न कारणों के चलते इन प्रतियोगिताओं को अलग से आयोजित नहीं करने का निर्णय लिया गया। भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज के प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने कहा कि प्रदेश में छात्र संख्या में लगातार कमी और सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन घटने के कारण इन प्रतियोगिताओं के पृथक आयोजन की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। प्राथमिक विद्यालय श्रेणी की प्रतियोगिताओं का राष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रावधान नहीं होने से अपेक्षित खेल विकास का लाभ भी नहीं मिल रहा था।
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सरकार ने वित्तीय पहलू का उल्लेख करते हुए बताया कि इन प्रतियोगिताओं पर प्रतिवर्ष लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होते थे, जबकि यही राशि विद्यालयों में खेल सुविधाओं को मजबूत करने में अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अलावा अगस्त से नवंबर तक प्रतियोगिताओं के आयोजन से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं और शिक्षकों का काफी समय आयोजन संबंधी कार्यों में खर्च हो जाता था। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की स्कूल खेल प्रतियोगिताएं अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग में आयोजित होती हैं। 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थी अंडर-14 प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं, इसलिए अलग से प्राथमिक स्तर की प्रतियोगिताओं की आवश्यकता नहीं पाई गई। शिक्षा मंत्री के अनुसार समीक्षा में यह भी सामने आया कि प्राथमिक स्तर की प्रतियोगिताओं में विशेषज्ञ पर्यवेक्षण का अभाव रहता था, जिससे कम आयु के बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती थी। इसके अलावा विद्यार्थियों की भागीदारी सीमित होने तथा कई अवसरों पर प्रतिभागी छात्रों की तुलना में आयोजक शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या अधिक पाए जाने से प्रतियोगिताएं अपने उद्देश्य को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही थीं।
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