लाख कीट द्वारा तैयार की स्क्रैप को दिखाते डॉ. वीरेंद्र राणा।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
हिमाचल में लाख (लाक्षा) कीट पालन और उत्पादन आसानी से होगा। राजकीय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी के वैज्ञानिकों ने लाख कीट को विकसित करने में दूसरी बार सफलता पाई है। खैर के साथ प्लाश, पीपल, बैर के पेड़ पर भी इसका उत्पादन हो सकेगा।
शोध में सामने आया है कि हिमाचल का वातावरण लाख कीट के लिए उपयुक्त है। वैज्ञानिकों ने इससे पूर्व खैर के पेड़ों पर कीट उत्पादन पालन में सफलता प्राप्त की थी। अन्य पेड़ों पर शोध के लिए वैज्ञानिकों ने खग्गल स्थित शोध फार्म में प्लाश के पेड़ पर लाख कीट को विकसित करने का कार्य शुरू किया। वैज्ञानिकों को शोध में दूसरी बार सफलता मिली है। खैर, प्लाश, पीपल, बैर आदि लाख कीट के होस्ट प्लांट हैं।
लाख कीट के इन पसंदीदा पौधों पर पालन और उत्पादन का ट्रायल करना लाजमी है। ये कीट इन पेड़ों की टहनियों पर रहते हैं। वहीं से पोषण प्राप्त करते हैं। बाद में टहनियों को स्क्रैप कर लाख उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसके लिए 25 डिग्री तक तापमान जरूरी है। लाख कीट पीला, संतरी और लाल रंग का होता है। पीले रंग का कीट ज्यादा कीमती होता है। मादा कीट लाख उत्पाद बनाने काम करते हैं और नर मैचिंग का काम करते हैं। किसानों को लाख की व्यवसायिक खेती में आसानी होगी। शीघ्र ही नेरी महाविद्यालय में किसानों को लाख कीट का पालन और उत्पादन विषय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। लाख की बाजार में कीमत 1,500 रुपये प्रति किलो तक है। भारत से उत्पादित लाख का 30 फीसदी जर्मनी और अमेरिका निर्यात होता है।
लाख कीट करीब दो वर्ष पूर्व शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, जम्मू से लाए गए। स्टिक के माध्यम से लाकर खैर के पेड़ों की टहनियों पर स्थापित किए गए थे जिससे अब लाख स्क्रैप, उत्पादन आने की पूरी संभावना है। यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा है। शोध में पाया गया है कि हमीरपुर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों की जलवायु लाख कीटों के पालन के लिए उपयुक्त है इसलिए किसान लाख कीट के होस्ट पेड़ों पर इसका पालन और उत्पादन कर सकते हैं। -डॉ. वीरेंद्र राणा, अध्यक्ष, कीट विज्ञान विभाग नेरी महाविद्यालय