इसके अलावा लगभग 1,750 बस सेवाएं ऐसी चल रही हैं जो डीजल और रखरखाव का खर्च तक नहीं निकाल पा रही हैं। निगम के पास केवल कुछ ही लाभकारी रूट बचे हैं, जबकि निजी ऑपरेटर केवल मुनाफे वाले रूटों पर बसें चला रहे हैं। मुख्य सचिव की ओर से 12 दिसंबर को दायर हलफनामे में खुलासा किया गया है कि एचआरटीसी इस समय गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। अदालत में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि एचआरटीसी की मासिक आय लगभग 70 करोड़ रुपये है, जबकि खर्च 145 करोड़ है। कुल देनदारी 1396 करोड़ है। इनमें 1130.24 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया हैं। सरकार प्रतिमाह औसतन 60 करोड़ की मदद दे रही है, जो नाकाफी साबित हो रही है।