हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि गिफ्ट डीड (दान-पत्र) इस शर्त पर की गई हो कि दान प्राप्त करने वाला व्यक्ति दाता और उसकी पत्नी की वृद्धावस्था में देखभाल व रखरखाव करेगा, तो इस शर्त का उल्लंघन होने पर गिफ्ट डीड रद्द की जा सकती है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि केवल मनी ऑर्डर के माध्यम से पैसे भेज देना वृद्ध व्यक्तियों की सेवा और देखभाल का विकल्प नहीं माना जा सकता। बुजुर्गों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ शारीरिक देखभाल, सम्मान और व्यक्तिगत ध्यान की भी आवश्यकता होती है। इसलिए वादी की ओर से मनी ऑर्डर लौटाना उसकी गलती नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने जिला अदालत शिमला के फैसले को निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट ठियोग के 12 नवंबर 2002 के निर्णय को बहाल कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने गिफ्ट डीड रद्द करते हुए संबंधित भूमि का अधिकार दाता के कानूनी प्रतिनिधियों को लौटाने का आदेश दिया था।