गौरतलब है कि अपीलकर्ता कुसुम ठाकुर का विवाह 19 सितंबर 2009 को सुरेंद्र सिंह कादियान से हुआ था। याचिकाकर्ता के अनुसार शादी के कुछ ही समय बाद उसे दहेज और अन्य कारणों से प्रताड़ित किया जाने लगा। 19 सितंबर 2010 को पहली मैरिज एनिवर्सरी के दिन पति ने शराब के नशे में मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। वहीं पति पूर्व में भी दो शादियां कर चुका था, जिनका तलाक हो चुका है। वह नेट और पीएचडी पास उच्च शिक्षित प्राध्यापक हैं। पत्नी ने वर्ष 2011 में धारा 125 सीआरपीसी के तहत 20,000 प्रति माह गुजारा भत्ते की मांग की थी।
फैमिली कोर्ट कांगड़ा (धर्मशाला) ने 29 अप्रैल 2019 को मात्र 5,000 प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश सुनाया था, जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत में प्रस्तुत वेतन प्रमाण पत्र और गवाहों के बयानों से साबित हुआ कि पति विभिन्न कॉलेजों में प्रोफेसर/लेक्चरर के पद पर कार्यरत रहकर 50,000 प्रति माह वेतन ले रहा था। इसके अलावा, हाईकोर्ट की ओर से संपत्ति एवं आय का हलफनामा मांगने पर भी पति ने हलफनामा दाखिल नहीं किया, जिसे अदालत ने उसकी वास्तविक आय छिपाने का प्रयास माना। वहीं पति ने दावा किया था कि पत्नी नूरपुर में शॉल की दो दुकानें चलाती है। लेकिन अदालत ने पाया कि वे दुकानें उसके पिता की हैं। पत्नी के पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है।