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हाईकोर्ट का आदेश: पति की 50 हजार कमाई, फिर भी पत्नी को पांच हजार गुजारा भत्ता देना अनुचित

Tue, 25 Aug 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश में बड़ा संशोधन करते हुए पीड़ित पत्नी के गुजारा भत्ता की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश में बड़ा संशोधन करते हुए पीड़ित पत्नी के गुजारा भत्ता की राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।अदालत ने माना कि पति की 50 हजार कमाई है और उसके बावजूद भी पत्नी को 5 हजार रुपए गुजारा भत्ता देना अनुचित है। अदालत ने कहा कि 2011 से 2026 तक लागत मुद्रास्फीति सूचकांक 184 से बढ़कर 384 हो गया है। 15 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान महिला को 5 हजार की मामूली राशि पर छोड़ना अनुचित है। हाईकोर्ट ने माना कि समय के साथ गुजारा भत्ते में नियमित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

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न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की पीठ ने फैमिली कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए याचिका स्वीकार करते हुए संशोधित गुजारा भत्ता प्रति माह 9 मार्च 2011 से 8 मार्च 2016 तक 5 हजार,9 मार्च 2016 से 8 मार्च 2021 तक 7 हजार और 9 मार्च 2021 से अप्रैल 2026 के लिए 9 हजार किया। इसके अलावा अगले 2-2 साल बाद 5 फीसदी की वार्षिक वृद्धि की बढ़ोतरी करने की आदेश दी है। अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह पूर्व में दिए गए अंतरिम भत्ते का समायोजन करते हुए बकाए का भुगतान 4 सप्ताह के भीतर करे।

गौरतलब है कि अपीलकर्ता कुसुम ठाकुर का विवाह 19 सितंबर 2009 को सुरेंद्र सिंह कादियान से हुआ था। याचिकाकर्ता के अनुसार शादी के कुछ ही समय बाद उसे दहेज और अन्य कारणों से प्रताड़ित किया जाने लगा। 19 सितंबर 2010 को पहली मैरिज एनिवर्सरी के दिन पति ने शराब के नशे में मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। वहीं पति पूर्व में भी दो शादियां कर चुका था, जिनका तलाक हो चुका है। वह नेट और पीएचडी पास उच्च शिक्षित प्राध्यापक हैं। पत्नी ने वर्ष 2011 में धारा 125 सीआरपीसी के तहत 20,000 प्रति माह गुजारा भत्ते की मांग की थी।
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फैमिली कोर्ट कांगड़ा (धर्मशाला) ने 29 अप्रैल 2019 को मात्र 5,000 प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश सुनाया था, जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत में प्रस्तुत वेतन प्रमाण पत्र और गवाहों के बयानों से साबित हुआ कि पति विभिन्न कॉलेजों में प्रोफेसर/लेक्चरर के पद पर कार्यरत रहकर 50,000 प्रति माह वेतन ले रहा था। इसके अलावा, हाईकोर्ट की ओर से संपत्ति एवं आय का हलफनामा मांगने पर भी पति ने हलफनामा दाखिल नहीं किया, जिसे अदालत ने उसकी वास्तविक आय छिपाने का प्रयास माना। वहीं पति ने दावा किया था कि पत्नी नूरपुर में शॉल की दो दुकानें चलाती है। लेकिन अदालत ने पाया कि वे दुकानें उसके पिता की हैं। पत्नी के पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं है।
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