करवाचौथ व्रत के लिए बाजार मेें मेंहदी लगवाती महिलाएं। स्रोत : संवाद
अवाहदेवी (हमीरपुर)। जिलेभर में एक नवंबर को सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी। करवाचौथ का व्रत पति की लंबी आयु, अच्छा स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए किया जाता है। पतिव्रता महिलाएं इस दिन अन्न, जल और फल को ग्रहण नहीं करती हैं। इस व्रत को महिलाएं चंद्र दर्शन के बाद खोलती हैं। यह व्रत हर वर्ष कार्तिक मास में कृष्णपक्ष की चतुर्थ तिथि को किया जाता है।
पंडित वेद प्रकाश शर्मा ने कहा कि इस व्रत में भगवानशिव, माता पार्वती, गणेश, स्वामिकार्तिकेय, चंद्रमा और करवा माता का पूजन किया जाता है। इस व्रत को सौभाग्यवती स्त्रियां और उसी वर्ष में विवाही गईं लड़कियां पति की दीर्घायु के लिए करतीं हैं। यह व्रत निर्जला किया जाता है। इस व्रत को चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही खोला जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूतक-पातक या मासिक धर्म होने पर महिलाएं चांद को अर्घ्य नहीं देंगी। ऐसी स्थिति में महिलाएं सिर्फ चांद का दीदार करके चांद को पांच बार चावल अर्पण करें। हमीरपुर जिले में चंद्रोदय का समय लगभग आठ बजकर नौ मिनट है।
बाजार में खूब चहल-पहल रही
करवाचौथ पर्व पर जिला हमीरपुर के बाजारों में आजकल खूब रौनक है। महिलाएं नए सूट और सौंदर्य प्रसाधन खरीद रही हैं। मेहंदी लगाने के लिए भी हमीरपुर शहर में जगह-जगह स्टाल लगाए गए हैं।