भोटा (हमीरपुर)। पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण को एक साथ साधते हुए अब महिलाएं जंगल में बेकार पड़ीं चीड़ की सूखी पत्तियों को उच्च गुणवत्ता वाले बाजारू उत्पादों में बदलेंगी। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह पर हस्तशिल्प सेवा केंद्र कुल्लू द्वारा भोटा में 60 दिवसीय डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट वर्कशॉप शुरू की गई।
इस कार्यशाला में 30 महिलाओं को पाइन नीडल्स को वुड क्राफ्ट के साथ फ्यूज (मिलाकर) करके आकर्षक और टिकाऊ हस्तशिल्प बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल न केवल महिलाओं को आय का साधन प्रदान करेगी, बल्कि चीड़ की पत्तियों के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देकर जंगलों को आग के खतरों से बचाने में भी मदद करेगी।
महिलाओं को यह प्रशिक्षण चंबा की पैनल डिजाइनर हीना और ऊना की मास्टर क्राफ्ट पर्सन कविता द्वारा दिया जाएगा। कार्यशाला के शुभारंभ पर पूर्व में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकीं 50 महिलाओं को टूलकिट भी वितरित की गई, ताकि वे अपने हस्तशिल्प व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें। कार्यक्रम में पूर्व में चल रहे एक अन्य प्रशिक्षण शिविर का समापन भी किया गया।
इस मौके पर बड़सर के इंद्रदत्त लखनपाल, हस्तशिल्प प्रोत्साहन अधिकारी संदीप कुमार, देवी सिंह ठाकुर, ईपीसीएच के प्रतिनिधि रंजन, जिला परिषद सदस्य राजेश कुमार सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद