हमीरपुर। आयकर विभाग की ओर से दायर 15 साल पुराने कर चोरी के मामले एक महिला को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हमीरपुर राजेश तोमर की अदालत ने निचली अदालत के सजा के आदेश को रद्द करते हुए मेसर्स वेरका मिल्क एजेंसी हमीरपुर की पूर्व प्रोपराइटर चंचल डोगरा को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
मामला वित्त वर्ष 1998-99 का है। आयकर विभाग का आरोप था कि चंचल डोगरा ने होशियारपुर डिस्ट्रीक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन को 20,000 रुपये से अधिक का नकद भुगतान करके आयकर अधिनियम की धारा 40 ए (3) का उल्लंघन किया था।
इस आधार पर विभाग ने उन पर 13,45,595 की देनदारी तय की थी और टैक्स जमा न करने पर धारा 276 सी (2) के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। सीजीएम कोर्ट हमीरपुर ने 30 दिसंबर 2024 को फैसला सुनाते हुए चंचल डोगरा को 3 महीने के साधारण कारावास और 2,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इस फैसले के खिलाफ चंचल डोगरा ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि 1998-99 के मामले में विभाग ने 2016 में शिकायत दर्ज कराई थी, जो कि 15 साल की भारी देरी के बाद हुई थी।
कानून के तहत 3 साल तक की सजा वाले अपराध में संज्ञान लेने की निश्चित समय सीमा होती है। अदालत ने माना कि समय सीमा समाप्त होने के बाद दर्ज शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनी रूप से अमान्य था।
इसके अलावा, आरोपी महिला द्वारा व्यवसाय बंद करने के बाद भी स्वेच्छा से 15,000 प्रतिमाह किस्त देने की बात से जानबूझकर कर चोरी की मंशा साबित नहीं होती। इन सभी तथ्यों के आधार पर सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला निरस्त कर चंचल डोगरा को बरी कर दिया।