हमीरपुर। लोक निर्माण विभाग में ठेकेदारों को बिना एक्स फार्म लिए ही भुगतान किया जा रहा है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने बीते वर्ष एक फैसले के तहत आगामी आदेशों तक सरकारी विभागों में बिना एक्स फार्म किसी भी तरह के भुगतान पर रोक लगाई हुई है। इस मामले में इसी माह प्रदेश उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई तय है।
न्यायालय ने सभी विभागों को आदेश जारी किए हैं कि केवल कानूनी स्रोत से लाई गई रेत, बजरी और पत्थर का ही भुगतान किया जाए ताकि प्रदेश में पर्यावरण नुकसान और सरकार को राजस्व के रूप में हो रहे नुकसान से बचा जा सके। बता दें कि पूर्व में कई सरकारी ठेकेदार एवं बिल्डर नदी और नालों से रेत और बजरी लाकर इसका निर्माण कार्यों में प्रयोग करते थे। जिससे जहां अवैध खनन बढ़ रहा है, वहीं निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल भी हो रहा था। इसके अलावा सरकार को राजस्व के रूप में भी नुकसान हो रहा है। इस सारे मामले पर एक व्यक्ति ने प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश उच्च न्यायालय ने आगामी आदेशों तक बिना एक्स फार्म भुगतान न करने के आदेश जारी किए हैं। लोनिवि के कई मंडलों में सड़कों की टारिंग के दौरान सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया गया है। टारिंग कार्य के लिए जब ठेकेदारों को टेंडर अवार्ड हुआ था तो उस दौरान तारकोल के दाम अधिक थे, लेकिन जब काम शुरू किया गया तो तारकोल के दाम में गिरावट दर्ज हुई थी। तारकोल के तत्कालीन दाम के आधार पर ठेकेदारों को भुगतान किया जाना था, लेकिन कई जगह ऐसा नहीं हुआ। उधर, अधिवक्ता दीपक कौशल ने कहा कि इस मामले में 31 मार्च को आगामी सुनवाई होनी है। तब तक बिना एक्स-फार्म किसी भी विभाग में ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया जा सकता। एक्स फार्म निर्माण सामग्री के कानूनी स्रोत का आधार है।
उधर, लोनिवि हमीरपुर के मुख्य अभियंता डीएस देहल ने कहा कि प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों का पूर्णता पालन होना चाहिए। अगर कहीं इन आदेशों की अवहेलना हुई है तो इसकी जांच कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।