भारतीय खाद्य निगम की ओर से फ्लोरमिल को भेजी गेहूं में गड़बड़ी सामने आई है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने मामले की जांच कर रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी है। अब निदेशालय की तरफ से आदेश मिलने के बाद फ्लोरमिल के खिलाफ आगामी कार्रवाई की जाएगी।
हमीरपुर जिला की एक मिल को बीते साल 2500 क्विंटल गेहूं का स्टॉक भेजा था। फ्लोरमिल को पिसाई के बाद आटा उचित मूल्य की दुकानों में भेजना था। हालांकि दिसंबर माह के बाद उचित मूल्य की दुकानों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले आटे पर रोक लगा दी।
विभाग की टीम फ्लोरमिल में जांच के लिए पहुंची तो मिल के गोदाम में न यह गेहूं मौजूद है और न ही जिले की उचित मूल्य की दुकानों को आटा भेजा गया। मिल के स्टॉक में गेहूं मौजूद है, लेकिन मौके पर पहुंची जांच टीम ने गेहूं को गायब पाया।
इससे स्पष्ट है कि सरकार के आटा सप्लाई बंद करने के आदेश के बाद गेहूं को आटा के रूप में उचित मूल्य की दुकानों में नहीं भेजा गया। अंदेशा है कि आटा डिपुओं में भेजने के बजाय मार्केट में बेच दिया गया है।
हालांकि अब तक की गई मामले की जांच में संबंधित मिल मालिक ही दोषी पाया जा रहा है। विभागीय टीम अब मिल मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने के मूड में है।
खाद्य आपूर्ति विभाग के एसएसओ प्रताप सिंह ठाकुर का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।