गांव के इतिहास, लोक संस्कृति, परंपरा और जनजीवन को समझना जरूरी : चेतराम
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दौरान शनिवार को ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हमीरपुर ने हिमाचल प्रदेश के गांव का इतिहास पुस्तक का लोकार्पण किया। इस दौरान शोध संस्थान के निदेशक एवं मार्गदर्शक डॉ. चेतराम गर्ग ने कहा कि गांव का इतिहास भारतीय इतिहास के पुनर्लेखन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत के इतिहास को समझने के लिए गांव के इतिहास, लोक संस्कृति, परंपरा, जनजीवन और सामाजिक व्यवस्थाओं को समझना बहुत जरूरी है। संस्थान के प्रेस सचिव डॉ. मनोज डोगरा ने कहा कि भारत का अधिकांश इतिहास आक्रमणकारी अंग्रेजों और मुगलों की ओर से लिखा गया है। ऐतिहासिक घटनाओं से संबंधित विसंगतियों के चलते इसका अपेक्षित संशोधन एवं पुनर्लेखन जरूरी है। गांव के इतिहास का लेखन वहीं के स्थानीय विद्वान लेखकों की ओर से किया जाना चाहिए। इस दृष्टि से 12 चयनित गांवों के इतिहास लेखन के लिए स्थानीय विद्वान लेखकों को चुना गया है। ये वहां की संस्कृति, इतिहास, परंपरा और लोक जीवन को अच्छी तरह से जानते हैं, तभी इसकी प्रामाणिकता संभव है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष समाजसेवी राजकुमार वर्मा ने कहा कि शोध संस्थान नेरी की ओर से अपनी स्थापना के बहुत कम वर्षों में साहित्य के विभिन्न विषयों पर आधारित सेमिनार, कार्यशालाएं, परिचर्चाएं आयोजित की गई हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से जो शोधपत्र प्राप्त हुए हैं उन्हें निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है। सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के पूर्व कुलपति एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर डीडी शर्मा ने कहा किसी भी देश का इतिहास उसकी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक व्यवस्था नागरिकों के लिए गौरव का विषय होता है लेकिन उसमें होने वाली विकृतियां उसे कमजोर कर देती हैं। इसलिए इतिहास का प्रामाणिक संशोधन और उसका अगली पीढि़यों के लिए स्थानांतरण अत्यंत आवश्यक है।