विकसित भारत के बावजूद बेड और स्ट्रेचर पर ले जाने पड़ते हैं मरीज
ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से गांव केे लिए एंबुलेंस योग्य सड़क निकलवाने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज से 500 मीटर दूर और राष्ट्रीय उच्च मार्ग के साथ लगते रंगस गांव में आधुनिक युग में भी एंबुलेंस योग्य सड़क उपलब्ध नहीं हैं। गांव तक सड़क का न होना लोगों के लिए आपात स्थिति में परेशानी का सबब बन जाती है। ग्रामीणों को मरीजों को बेड या स्ट्रेचर पर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। वहीं, आग की घटना होने पर फायर ब्रिगेड वाहन भी गांव में नहीं पहुंच पाते।
ग्रामीणों राजेंद्र सिंह, शिवेश, अनीश ठाकुर, राज कुमार व अजय ठाकुर आदि ने प्रदेश सरकार से गांव के लिए संपर्क सड़क निकालने को लेकर सर्वे की मांग की है। ताकि लोगों को यह पता चल सके कि किस तरफ से और कैसे सड़क को निकालना सुविधाजनक रहेगा। वर्तमान में गांव में अधिकतर बुजुर्ग लोग रहते हैं या फिर अधिकतर परिवारों के युवा, परिजन निजी नौकरी के चलते अन्य प्रदेशों में रहते हैं। ऐसी स्थिति में से कई बार आपातकाल की स्थिति से गुजरना पड़ा है। पुराने जमाने की तरह आज भी ज्यादा बीमार होने पर किसी भी मरीज को या तो कंधों पर ले जाना पड़ता है या फिर स्ट्रेचर या बेड पर ले जाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। उन्होंने प्रदेश सरकार से समस्या का समाधान करने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को समस्या का सामना न करना पड़े।
इस बारे में लोक निर्माण विभाग अनुभाग रंगस के कनिष्ठ अभियंता सुशील कुमार ने कहा कि यदि ग्रामीणों की ओर सड़क निर्माण की मांग आती है तो इस बारे में उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा ताकि गांव में एंबुलेंस योग्य सड़क का निर्माण हो सके।