संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश तोमर की अदालत ने मारपीट और जमीन को नुकसान पहुंचाने के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से दो युवकों को सुनाई गई सजा के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
यह मामला साल 2019 का है। वार्ड नंबर-10, राम नगर (हमीरपुर) निवासी दो युवकों पर आरोप था कि उन्होंने 19 अप्रैल 2019 को एक व्यक्ति की जमीन पर जेसीबी मशीन चलाकर कब्जा करने की कोशिश की और विरोध करने पर शिकायतकर्ता की पत्नी के साथ मारपीट की।
निचली अदालत ने जनवरी 2024 में इस मामले पर फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 447 (अतिक्रमण), 287 और 323 (मारपीट) के तहत दोषी करार दिया था और उन्हें एक साल तक की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। घटना 19 अप्रैल की बताई गई थी, जबकि पुलिस में शिकायत 22 अप्रैल को दर्ज करवाई गई।
अदालत ने पाया कि पुलिस स्टेशन घटनास्थल से मात्र 10 मिनट की दूरी पर होने के बावजूद तीन दिन की देरी का कोई ठोस कारण नहीं दिया गया। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में काफी अंतर था, जिससे पूरी घटना संदिग्ध प्रतीत हो रही थी।
अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 2 अप्रैल, 2026 को अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने आदेश दिया कि यदि आरोपियों ने कोई जुर्माना राशि जमा की है, तो उसे भी वापस लौटाया जाए।