रंगस (हमीरपुर )। पंचायत व प्रशासन के बीच संवाद की कमी का खमियाजा ग्राम पंचायत जोलसप्पड़ के गांव खिलां के लोग भुगत रहे हैं। समन्वय की कमी के कारण अधिकारी बरसात के तीन माह बाद खिलां गांव में हुए नुकसान की रिपोर्ट लेने के लिए मौके पर पहुंचे हैं।
लोगों की मानें तो खिलां में करीब 300 कनाल भूमि भूस्खलन की जद में आई है और अभी भी यहां पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। उपमंडल नादौन की अंतिम ग्राम पंचायत जोलसप्पड़ के गांव खिलां नजदीक जसकोट में बरसात के दौरान अगस्त में भारी भूस्खलन हुआ था। इसे पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता कहें या फिर जानकारी का अभाव कि भूस्खलन की सूचना प्रशासन तक पहुंची ही नहीं, जबकि पीड़ित परिवारों ने पंचायत के प्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी थी। इसके चलते इन परिवारों को अभी तक सरकार की ओर से कोई भी आर्थिक या अन्य प्रकार की कोई भी मदद नहीं मिल पाई।
गांववासी बेली राम, अशोक कुमार, ललित, विकास व रमेश चंद आदि ने कहा कि सूचना के बावजूद कोई भी प्रशासनिक अधिकारी न मौके पर नहीं आया। भूस्खलन से करीब 300 कनाल निजी भूमि क्षतिग्रस्त हुई है। इस मौके पर कानूनगो सनम धीमान, सुरेश, पटवारी सुशील व कृष्ण आदि उपस्थित रहे।
कोट्स :
शुक्रवार सुबह मौके का निरीक्षण राजस्व विभाग द्वारा कर लिया गया है। संबंधित पटवारी और कानूनगो को क्रमवार मालिक/कब्जाधारी का नाम व किस्मवार कुल रकबा की स्टेटस रिपोर्ट बनाकर कार्यालय को भेजने के आदेश दिए हैं।
-बलवंत राणा, नायब तहसीलदार कांगू