नादौन (हमीरपुर)। गणेश उत्सव के मद्देनजर शहर के चौगला बाजार स्थित अखाड़े वाले मंदिर कमेटी ने गणपति प्रतिमा के विसर्जन को लेकर अलग पहल की है। मंदिर में स्थापित की जाने वाली गणपति की पीतल की छोटी प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाएगा।
दस दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन प्रतिमा को गंगा स्नान करवाकर दोबारा मंदिर में स्थापित किया जाएगा। मंदिर के पुजारी रामानुज शर्मा ने बताया कि गणपति की पीतल की प्रतिमा की आगामी दस दिनों तक नियमित पूजा-अर्चना होगी।
अनंत चतुर्दशी पर विशेष पूजन के बाद प्रतिमा को गंगा स्नान करवाकर विधिवत मंदिर में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल सहित उत्तर भारत के हिमालय क्षेत्र को भगवान गणेश का घर माना जाता है।
इसी मान्यता के चलते यहां स्थापित गणपति प्रतिमा को विसर्जित करने के बजाय मंदिर में सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि हिमालय में भगवान गणेश के विराजमान होने की मान्यता शास्त्रों और पौराणिक ग्रंथों में मिलती है।
रामानुज शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के कई हिस्से पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में धार्मिक परंपराओं को लेकर स्थानीय मान्यताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में गणपति विसर्जन की अपनी अलग धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर कमेटी का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। सभी की आस्था का सम्मान करते हुए स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार गणपति प्रतिमा को विसर्जित नहीं करने का निर्णय लिया गया है।