हमीरपुर। जिले में पेट्रोल और डीजल से चलने वाली टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने को लेकर वाहन मालिकों में उत्साह नजर नहीं आ रहा है। अब तक एक भी वाहन मालिक ने अपनी टैक्सी को इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करने के लिए आवेदन नहीं किया है।
राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत टैक्सी संचालक अपने पेट्रोल-डीजल वाहनों को ई-टैक्सी में बदल सकते हैं। इस योजना में निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। कम रुचि को देखते हुए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 19 फरवरी कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक टैक्सी संचालक योजना का लाभ उठा सकें।
जागरूकता की कमी, प्रारंभिक लागत और चार्जिंग स्टेशन की सीमित उपलब्धता सहित अन्य कारणों से वाहन संचालक आगे नहीं आ रहे हैं। इससे राज्य में हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे।
योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को स्वीकृत ई-टैक्सी की लागत का 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये निर्धारित की गई है। यह सब्सिडी श्रम, रोजगार एवं विदेश नियोजन विभाग के माध्यम से प्रदान की जाएगी।
कोट
राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत आवेदन तिथि को 19 फरवरी तक बढ़ाया गया है। अभी तक पेट्रोल और डीजल से चलने वाली टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है।
-अंकुश शर्मा, आरटीओ हमीरपुर