संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। हमीरपुर जिले में पहाड़ी टोपी का ट्रेंड युवाओं में देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि हमीरपुर में भी किन्नौरी और कुल्लवी टोपी पर किन्नौरी फूल और विभिन्न धातुओं की कलगी वाली टोपी भी युवाओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
पुराने समय में इन टोपियों को केवल राजनीति के साथ जोड़कर देखा जाता था, जिसमें एक पार्टी के लिए हरा तो दूसरी पार्टी से संबंधित लोग मैरून रंग की टोपी पहनना पसंद करते थे, लेकिन अब युवाओं में ट्रेंड बदल गया है। युवा अब डिजाइन वाली टोपियों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
इसके अलावा अब शादी समारोह में दूल्हे के पक्ष के लोग भी बारातियों को पगड़ी देने के स्थान पर टोपियां पहनाने को तवज्जो दे रहे हैं। किन्नौरी और कुल्लवी टोपी अब हर युवा वर्ग में अपनी पहचान बनाती जा रही है।
हमीरपुर में किन्नौरी और कुल्लवी टोपियों की विशेष मांग है। बेहतर गुणवत्ता की टोपी 200 से 500 रुपये तक मिल रही है, वहीं अलग-अलग कलगी भी प्रचलन में हैं। इनकी कीमत भी 300 से 500 रुपये तक है। युवाओं के साथ-साथ युवतियां भी इनके प्रति अपना रुझान दिखा रही हैं। हालांकि अभी सर्दी का मौसम शुरू हुआ है, लेकिन लोग बाजार में इन टोपियों के साथ अलग ही नजर आते हैं।
दुकानदारों की मानें तो पहले इनकी मांग केवल किसी कार्यक्रम में ही अधिक होती थी, लेकिन अब डिजाइनदार टोपियों की मांग अधिक हो रही है। इनमें युवाओं का अधिक रुझान है।
कोट्स :
पहले राजनीतिक लोग हरे और लाल रंग की टोपियों को अधिक पसंद करते थे, लेकिन समय परिवर्तन के साथ अब डिजाइनदार टोपियों की मांग अधिक बढ़ गई है। अब लोग कलगी और किन्नौरी फूल लगवाना भी पसंद कर रहे हैं।
-राजेश कुमार, दुकानदार
पहले कार्यक्रम के दौरान ही लोग किन्नौरी और कुल्लवी टोपी की मांग करते थे। पहले यह सम्मानित करने के लिए खरीदी जाती थी, लेकिन अब शादी समारोह में भी इनकी मांग अधिक बढ़ गई है। लोग डिजाइनदार टोपियां खरीद रहे हैं।
-निशांत, दुकानदार
किन्नौरी टोपी की अपनी अलग ही पहचान है। पहले इसे पहाड़ी टोपी कहा जाता था। किन्नौरी टोपी पहनने से व्यक्ति का व्यक्तित्व ही बदल जाता है। पहले साधारण टोपी का रिवाज था, लेकिन अब किन्नौरी फूल और कलगी भी इसकी शान बढ़ा रहे हैं।
-संजू चौधरी
किन्नौरी टोपी हिमाचल की अलग पहचान है, अगर आप टोपी को लगाकर किसी भी राज्य में चले जाएंगे तो आपकी पहचान हिमाचली के रूप में स्वयं हो जाएगी। अब समय परिवर्तन के साथ इसमें भी बदलाव आया है। अब कलगी और फूल भी लोग पसंद कर रहे हैं।
-अजय कुमार
निशांत
निशांत
निशांत
निशांत
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