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सीएम के गृह जिले में चिकित्सकों के डेपुटेशन का जुगाड़ कर चलाई जा रही व्यवस्था : संघ

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हमीरपुर। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारियों के सैकड़ों पद रिक्त चल रहे हैं। प्रदेश के युवा चिकित्सक जो एमबीबीएस की पढ़ाई पूर्ण कर चुके हैं, वे रोजगार की तलाश में हैं। उन्हें भी प्रदेश की जनता की सेवा करने का मौका नहीं दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी इन रिक्त स्थानों में डेपुटेशन के माध्यम से ही जुगाड़ करके स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन हमीरपुर के पदाधिकारियों ने प्रेस बयान में यह बात कही है।
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मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन हमीरपुर के जिलाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र डोगरा, महासचिव डॉ. वेंटेश्वर रणौत, कोषाध्यक्ष डॉ. पंकज पठानिया, प्रेस सचिव डॉ. अभिमन्नु डोगरा ने कहा कि हमीरपुर जिले में तो चिकित्सकों की कमी का यह आलम है कि एक स्वास्थ्य खंड से दूसरे स्वास्थ्य खंड में भी चिकित्सक अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की वर्षों से पदोन्नति नहीं हुई है। इसके बावजूद 50 फीसदी से अधिक पदों पर पदोन्नति नहीं हो पाई है। 2016 के बाद विभाग चिकित्सकों की वरीयता सूची बनाने में असफल रहा है। संघ की यह भी मांग है कि प्रदेश की एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर का चार्ज भी एमबीबीएस चिकित्सकों को ही दिया जाए। एक ही जिले में एक ही साथ अनुबंध पर नियुक्त चिकित्सकों को अलग-अलग वेतनमान दिया गया। शुक्रवार को चिकित्सकों को काले बिल्ले लगाते हुए 16 दिन हो चुके हैं लेकिन सरकार ने चिकित्सकों को मांगों को अभी तक गंभीरता से नहीं लिया है।
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