डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। महादेव मंदिर दियोट में वीरवार को शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अरविंद शर्मा ने शिवलिंग उत्पति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एक बार सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु और सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के बीच यह विवाद हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। तभी अचानक वहां एक अनंत, तेजस्वी अग्नि-स्तंभ (ज्योति स्तंभ) प्रकट हुआ। यह स्तंभ इतना विशाल था कि उसका न आदि दिख रहा था, न अंत। यह वास्तव में भगवान शिव का स्वरूप था। ब्रह्मा हंस बनकर उस स्तंभ का ऊपरी छोर ढूंढने निकले। वहीं, भगवान विष्णु वराह रूप लेकर नीचे का छोर खोजने गए। दोनों बहुत समय तक खोजते रहे, लेकिन किसी को भी उस स्तंभ का अंत नहीं मिला। भगवान विष्णु ने स्वीकार किया कि वह अंत नहीं ढूंढ पाए, लेकिन ब्रह्मा ने झूठ बोल दिया कि उन्होंने अंत देख लिया। शिवजी ने विष्णु की सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें पूजनीय बताया और ब्रह्मा के झूठ से नाराज होकर उन्हें श्राप दिया कि उनकी पूजा पृथ्वी पर बहुत कम होगी। संवाद