नगर निगम हमीरपुर में लोगों काे विकास कार्य करवाने में पेश आ रही दिक्कतें
निगम के गठन के समय बंद हो गया था पार्षदों का मानदेय, अब प्रमाणपत्रों के कार्य करवाने में हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नगर निगम हमीरपुर में पार्षदों की शक्तियां प्रमाणपत्रों के प्रमाणीकरण तक सीमित हैं। यह शक्तियां भी ऑनलाइन आवेदन की औपचारिकताओं में उलझ कर रह गई है।
खास कर बेरोजगार के प्रमाणीकरण में अब काउंटर साइन के लिए बेरोजगारों को कई चक्कर काटने पड़ रहे हैं। नगर निगम में पटवारी का प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है, जबकि पटवारी इसके लिए लोगों को संबंधित पार्षद के पास भेज रहे हैं। पहले पार्षद ही इस प्रमाणपत्र को काउंटर साइन कर नगर निगम को भेजते थे, लेकिन अब पटवारी के माध्यम से जारी पत्र की नगर निगम की मांग ने लोगों को उलझा दिया है।
नगर परिषद हमीरपुर को बीते वर्ष नगर निगम का दर्जा मिला है। दर्जा मिलने के बाद से नगर परिषद का अस्तित्व खत्म हो गया है। अब सरकार के निर्देशों पर चुने हुए पार्षदों का मानदेय भी बंद हो चुका है। प्रमाणीकरण की शक्तियां पार्षदों को यथावत रखी गई हैं, लेकिन ऑनलाइन सुविधा से इसमें भी उलझन पैदा होने से शहरी परेशान हो रहे हैं।
प्रतापनगर वार्ड की पार्षद डिंपलबाला का कहना है कि बेरोजगार का प्रमाणपत्र देने के लिए पहले पार्षद के माध्यम से पत्र नगर निगम को भेजा जाता था, लेकिन अब इसे पटवारी के माध्यम से मांगा जा रहा है। ऐसे में पहले अभ्यर्थी को पटवारी और फिर पार्षद दोनों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। नगर निगम कार्यालय से उन्हें पटवारी के पास भेजा जा रहा है और पटवारी उन्हें पार्षद के पास भेज रहे हैं। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
कोट
शहरी क्षेत्र में बीपीएल परिवारों के अलावा नगर निकाय में अन्य परिवारों का रिकाॅर्ड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बेरोजगार का प्र्रमाणपत्र जारी करने से पहले संबंधित पार्षद और नगर निकाय से इसे वैरीफाई किया जाता है, ताकि किसी का गलत प्रमाणपत्र न बने।
-सुभाष कुमार, तहसीलदार हमीरपुर