हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रोजाना औसतन 15 प्रसव होते हैं, लेकिन लेबर रूम में लेबर पेन के अलावा आवश्यक सामग्री की कमी चल रही है। इस कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और उनके तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
तीमारदारों को ये सामान बाहर से निजी मेडिकल स्टोर से खरीदना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में लेबर रूम में प्रयोग होने वाले मेर्थजन, विटरीन, लेबर पेन बढ़ाने के लिए प्रयोग होने वाली दवाई के साथ-साथ अन्य कई सामग्रियों की कमी चल रही है। हालांकि कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि स्थानीय स्तर पर आवश्यक दवाइयों की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रोजाना 1000 से 1500 के करीब ओपीडी होती है। वहीं, रोजाना यहां पर दो से तीन जिलों के दस से 15 के करीब प्रसव करवाए जाते हैं। प्रसव के दौरान ग्लब्ज, टांके के लिए धागे, एंटिबायोटिक्स, इंजेक्शन, सीरिंज, बीपी को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों के साथ-साथ अन्य सहायक चीजों की आवश्यकता होती है। लेकिन, मेडिकल कॉलेज के लेबर रूम में प्रयोग होने वाली आवश्यक चीजों की कमी हो गई है।
इस कमी के कारण गर्भवती महिलाओं के तीमारदारों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर बाहर से ये सामाग्री लेनी पड़ रही हैं। तीमारदारों ने कॉलेज प्रबंधन से मांग की है कि आवश्यक चीजों की कमी की जल्द से जल्द पूर्ति की जाए, ताकि उन पर आर्थिक बोझ न पड़े और उन्हें ज्यादा परेशान न होना पड़े।
कोट
स्थानीय स्तर पर इस सामाग्री की खरीद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। आज या कल में जरूरी चीजें उपलब्ध करवा दी जाएंगी। मरीजों को यहां पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती हैं।
-डॉ. देसराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर