यशपाल साहित्य सदन नादौन में क्रांतिकारी एवं साहित्यकार यशपाल की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उ
नादौन(हमीरपुर)। महान क्रांतिकारी एवं साहित्यकार यशपाल की जयंती पर यशपाल साहित्य सदन नादौन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम जिला भाषा अधिकारी संतोष पटियाल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
यशपाल साहित्य परिषद नादौन के अध्यक्ष डॉ. रत्न चंद शर्मा ने साहित्यकार यशपाल के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित रचनाकार पद्मभूषण यशपाल का जन्म 3 दिसंबर, 1903 को नादौन के भूंपल में हुआ था। स्कूल की शिक्षा के दौरान ही वह महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के प्रभाव में आ गए थे। वह छह वर्षों तक जेल में रहे।
यशपाल जेल में रहते हुए ही कहानियां लिखने लगे थे। जेल से बाहर आने पर उन्होंने पिंजड़े की उड़ान के रूप में अपने पहले कहानी-संग्रह का प्रकाशन कराया। वह विप्लव नाम से स्वयं की पत्रिका निकालने लगे। अंग्रेज सरकार के दबाव में यह पत्रिका जल्द ही बंद हो गई। वर्ष 1941 में उन्होंने कार्यालय नामक प्रकाशन संस्था और साथी प्रेस की स्थापना की।
वर्ष 1941 में उनका पहला उपन्यास दादा कॉमरेड और वर्ष 1943 में देशद्रोही प्रकाशित हुआ। यशपाल के उपन्यास झूठा सच को कालजयी कृति माना जाता है। उन्हें वर्ष 1970 में सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया, जबकि मृत्योपरांत मेरी तेरी उसकी बात के लिए उन्हें साहित्य अकादमी से पुरस्कृत किया गया।
वर्ष 2003-04 में उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर भारत सरकार द्वारा एक डाक टिकट भी जारी किया गया। इस मौके पर रत्न चंद रत्नाकर, केसर सिंह पटियाल, डीएस मिन्हास, अरविंद डोगरा, विवेक शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।