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तनाव और पारिवारिक झगड़ों ने बरबाद कर दिए कई परिवार

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हमीरपुर। जिला हमीरपुर में तनाव और पारिवारिक झगड़ों ने दर्जनों परिवार बरबाद कर दिए हैं। एक वर्ष के भीतर हमीरपुर में आत्महत्या का आंकड़ा 30 से अधिक पहुंच गया है। जोकि चिंता का विषय बन गया है। इस वर्ष जिले के दो चिकित्सकों और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स ने आत्महत्या कर अपनी इहलीला समाप्त की है।
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हमीरपुर जिला के रहने वाले एक एमबीबीएस चिकित्सक ने भी इसी साल अपने कमरे में आत्महत्या की थी। जबकि, बीते माह हमीरपुर में तैनात स्टाफ नर्स मोनिका ने भी अपने किराये के कमरे में फंदा लगाकर जान दी है। अब बुधवार रात को आयुर्वेदिक चिकित्सक ने मौत को गले लगा लिया। मेडिकल और पेरा मेडिकल स्टाफ में तनाव और अन्य कारणों से मौत ने मानव जीवनशैली पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला हमीरपुर के पांच विधानसभा क्षेत्र हैं, लेकिन ऐसा कोई विस क्षेत्र नहीं जहां इस साल आत्महत्या का मामला सामने नहीं आया। अधिकतर मौत के कारणों के पीछे पारिवारिक झगड़े रहे हैं। वहीं, कुछेक में तनाव और अन्य कारण सामने आए। कुछेक ने आशिकी में प्यार के छूटने और कुछेक ने नशे की गिरफ्त में आकर मौत को गले लगा लिया। आत्महत्या की वजह ढूंढने और ऐसे मामलों पर रोक के लिए सरकार को कोई उचित कदम उठाने होंगे। शिक्षाविदों के सुझाव स्कूली बच्चों के मनोवैज्ञानिक परीक्षण और काउंसलिंग पर भी आए दिन सामने आए हैं। जिस पर अब गंभीरता से सोचने का समय है। उधर, पुलिस अधीक्षक हमीरपुर अर्जित सेन ठाकुर ने कहा कि आत्महत्या के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। तनाव और अन्य कारणों की खोज कर समस्या का समाधान होना चाहिए।
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