बड़सर (हमीरपुर)। चैत्र मास मेले में सफाई व्यवस्था को लेकर प्रशासन और मंदिर न्यास अधिक गंभीर नहीं हैं। आलम यह है कि चैत्र मेलों को शुरू होने में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, लेकिन अभी तक अस्थायी शौचालय स्थापित नहीं हो पाए हैं।
शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक करीब चार किलोमीटर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थायी शौचालय तो दूर अस्थायी शौचालयों की सुविधा नदारद है। शौचालय न होने के कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में न केवल हिमाचल, बल्कि पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और विदेशों से भी यात्री विभिन्न माध्यमों से बालयोगी के दर्शन करने पहुंचते हैं।
इनमें कई श्रद्धालु बाबा बालक नाथ की तपोस्थली शाहतलाई से पैदल और दंडवत प्रणाम करते हुए चार किलोमीटर का सफर तय कर दियोटसिद्ध पहुंचते हैं। रास्ते में शौचालय न होने के कारण उन्हें खुले में ही शौच मुक्त होना पड़ता है। चैत्र मास मेले के दौरान करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
करीब एक माह तक चलने वाले इन मेलों में शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण गंदगी का माहौल रहता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को एक माह तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी शौचालयों का प्रबंध करना चाहिए, ताकि लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक चार किलोमीटर क्षेत्र में शौचालय न होने से दिक्कतें आती हैं। मजबूरी में इधर-उधर निवृत होना पड़ता है। हम प्रशासन से आग्रह करते हैं कि इस क्षेत्र में अस्थायी शौचालय स्थापित किए जाएं।
-प्रेम चंद, श्रद्धालु
चैत्र मास मेले में दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इनमें पैदल श्रद्धालु भी शामिल हैं। श्रद्धालुओं के लिए रास्ते में शौचालय की व्यवस्था बहुत आवश्यक है। इस बारे में कदम उठाए जाने जरूरी हैं।
-संजीव कुमार, श्रद्धालु
शौचालय की सुविधा न होने के कारण महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन को चाहिए कि एक माह के लिए अस्थायी शौचालय स्थापित करे, ताकि लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
-विक्रांत सरेना, श्रद्धालु
बाबा बालक नाथ मंदिर एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। दियोटसिद्ध से शाहतलाई तक शौचालय न होने से सफाई व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। अगर मेले के दौरान अस्थायी शौचालय स्थापित हों तो समस्या नहीं होगी।
-विक्की शर्मा, श्रद्धालु
प्रेम चंद
प्रेम चंद
प्रेम चंद