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Hamirpur (Himachal) News: रद्दी से डिस्पोजल प्लेट बनाकर आत्मनिर्भर बनी सुनीता

Thu, 22 Jan 2026 01:43 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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तूतडू की सुनीता घर पर पत्तल बनाते हुए। संवाद
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हमीरपुर। तूतडू गांव की सुनीता ने रद्दी और पुराने कागज से डिस्पोजल प्लेट बनाने का कार्य शुरू करके आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखने वाली सुनीता के पति दिव्यांग हैं और दिहाड़ी-मजदूरी करते हैं।
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ऐसे में सीमित आय होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, इलाज और अन्य जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन चुका था। ऐसे में सुनीता ने भी परिवार की आय में हाथ बंटाने का फैसला किया।
शुरुआत में उन्होंने आसपास के गांवों और बाजारों में छोटे-मोटे कामों के बारे में जानकारी जुटाई। इसी दौरान उन्हें डिस्पोजल प्लेट बनाने के काम के बारे में पता चला। उन्होंने बैंक से लोन लेकर पतल बनाने की मशीन खरीदी। फिर धीरे-धीरे कमाई से बैंक का लोन समाप्त किया। पतल बनाने का काम ऐसा था, जिसे घर से आसानी से किया जा सकता था।
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सुनीता ने पुराने अखबार, रद्दी कागज और कागज की शीट इकट्ठा करनी शुरू की। शुरुआत में उन्होंने बेहद कम संसाधनों के साथ काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सुबह घर के काम निपटाने के बाद वह पत्तल बनाने में जुट जातीं। दिन में कई घंटे मेहनत कर वह दर्जनों से लेकर सैकड़ों प्लेट तैयार करतीं। धीरे-धीरे उनके बनाए प्लेट की मांग बढ़ने लगी।
स्थानीय दुकानदार, चाय की दुकानें, छोटे ढ़ाबों और कार्यक्रमों में इस्तेमाल के लिए लोग उनसे प्लेट खरीदने लगे। आज वह हर महीने लगभग आठ से दस हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। डिस्पोजल प्लेट बनाने का यह काम केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अहम योगदान दे रहा है। प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने में कागज और प्राकृतिक सामग्री से बने पत्तल काफी सहायक साबित हो रहे हैं।
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