सरकारी जमीन न मिलने के कारण ठंडे बस्ते में पड़ी पक्का ठिकाना देने की कवायद
मुख्य बाजार में 150 से अधिक लोग रेहड़ी-फड़ी लगाकर कमा रहे हैं अपनी आजीविका
200 में से 50 लोगों को मिल पाई हैं पक्की दुकानें, अन्य सड़क किनारे खोखा लगाने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नगर निगम के तहत मुख्य बाजार में अस्थायी खोखाधारकों और रेहड़ी-फड़ी संचालकों को अभी तक स्थायी ठिकाना नहीं मिल पाया है। रेहड़ी-फड़ी संचालकों को स्थायी ठिकाना देने की कवायद अब ठंडे बस्ते में है। शहर में मुख्य बाजार में पहले लभगभ 200 रेहड़ी धारक थे, लेकिन इनमें से करीब 50 लोगों को ही पक्की दुकानें मिल पाई हैं।
मुख्य बाजार में अभी तक 150 रेहड़ी धारक/ खोखा संचालक हैंं जो आज भी पक्का ठिकाना मिलने की आस लगाकर बैठे हैं। हालांकि नगर निगम की बैठकों में रेहड़ी-फड़ी धारकों को पक्का ठिकाना देने की बात तो की जाती है, लेकिन सरकारी जमीन न मिलने के कारण यह कवायद हर बार ठंडे बस्ते में धकेल दी जाती हैं। ये रेहड़ी संचालक गांधी चौक से लेकर सब्जी मंडी तक फैले हुए हैं। इनमें कोई रेडीमेट कपड़ों की रेहड़ी लगाता है तो कोई बूट चप्पल या फिर सब्जी बेचकर अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करता है। विकास के लिए करोड़ों रुपये का प्लान तो तैयार किया जाता है, लेकिन इन लोगों की ओर कोई सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया जा रहा है।
नगर निगम हमीरपुर के तहत 150 करोड़ रुपये का विकास का प्लान तैयार किया गया है। इसमें इन रेहड़ी संचालकों को भी ठिकाना देने की बात की गई है, लेकिन धरातल पर अभी तक जमीन चिह्नित न होने के कारण इनका भविष्य आज भी अंधकार में हैं। अगर इन्हें बाजार से हटा दिया जाता है तो यह रेहड़ी धारक कहां जाएंगे । इसका कोई उत्तर प्रशासन के पास नहीं है।
कोट :
नगर निगम हमीरपुर के तहत करीब 150 करोड़ का प्लान तैयार किया गया है। रेहड़ीधारकों के लिए पक्का ठिकाना देने के लिए चर्चा की गई है, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। अगर जमीन मिलती है तो इन्हें पक्का ठिकाना दिया जाएगा। -राम प्रसाद, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम हमीरपुर