हमीरपुर जिला के नादौन रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्र में कोकून बचते हुए रेशम पालक।संवाद।
नादौन रेशम पालन और प्रशिक्षण केंद्र में बिका सबसे अधिक 12 क्विंटल कोकून
पश्चिमी बंगाल के व्यापारियों ने नादौन में की अच्छे कोकून की खरीददारी, मिले अच्छे दाम
संवाद न्यूज एजेंसी
जाहू (हमीरपुर)। सबसे साक्षर जिला हमीरपुर के लोग रेशम पालन अर्थात सेरीकल्चर में अच्छा कार्य कर अपनी पहचान बनाने लगे हैं। जिले के सात रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्र के किसानों ने 25 क्विंटल कोकून को बेच कर करीब 32 लाख की आय प्राप्त की है। जिले के नादौन रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्र में नादौन, कांगू, सलासी, बोहणी और कुछ जंगलबैरी के रेशम पालकों से करीब 12 क्विंटल कोकून खरीदा गया। इससे रेशम पालकों को अच्छे कोकून के 1200 से 1350 रुपये प्रति किलोग्राम दाम मिले हैं। इसी तरह जंगलबैरी के रेशम पालकों ने मंडी जिला के संधोल में करीब 6 क्विंटल कोकून को बेचकर 7 लाख से अधिक आमदनी प्राप्त की है। भोरंज उपमंडल के भलवानी रेशम पालन एवं प्रशिक्षण केंद्र के अधीन आने वाले रेशम पालकों ने करीब छह लाख में 5 क्विंटल कोकून बेचा है। इसी तरह बल्ह-विहाल के रेशम पालकों ने तीन क्विंटल कोकून को करीब साढे तीन लाख में बेचा है। विभाग की मानें तो इस बार 2023 से ज्यादा अच्छा कोकून रेशम पालक तैयार नहीं कर पाए हैं लेकिन बाहरी राज्यों के व्यापारियों के आने से कोकून के अच्छी कीमत मिली है। पश्चिमी बंगाल के कोलकाता से आए व्यापारी विपिन और जनत का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में तैयार कोकून सबसे अच्छा होता है और इससे अधिक धागा बनता है। इस दौरान सेरीकल्चर विभाग के नादौन खंड विकास अधिकारी नीशा रानी और ऊना के जगतपाल व रेशम पालक भी मौजूद रहे। रेशम पालन विभाग के विकास अधिकारी मदन लाल वर्मा का कहना है कि पहली बार रेशम पालकों को कोकून के अच्छे दाम मिले हैं। हमीरपुर जिले में करीब 1200 रेशम पालकों ने करीब 32 लाख रुपये का कोकून बेचा है। नादौन में करीब 350 रेशम पालकों ने 12 क्विंटल कोकून को बेचकर 16 लाख से अधिक आय प्राप्त की है। इससे आने वाले समय में रेशम पालन से अधिक किसान जुड़ेंगे।