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Hamirpur (Himachal) News: रोगाणुरोधी प्रतिरोध और प्रबंधन पर साझा किए विचार

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मेडिकल कालेज हमीरपुर के प्रचार्य एंटी माइक्रोबियल जागरूकता सप्ताह के दौरान हुई प्रतियोगिता की व
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हमीरपुर। राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी और फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से 18 से 24 नवंबर तक विश्व एंटी-माइक्रोबियल (रोगाणुरोधी) जागरूकता सप्ताह मनाया गया। इसका मकसद एंटी माइक्रोबियल थीम को बढ़ावा देना रहा। इस सप्ताह के दौरान बैच 2021 के एमबीबीएस छात्रों ने एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध के बारे में जागरूकता पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता और क्विज में भाग लिया। 22 नवंबर को छात्रों की ओर से एक लघु नाटिका का प्रदर्शन किया गया और रोगाणुरोधी प्रतिरोध और प्रबंधन पर डॉ. दिव्या चौहान और डॉ. बिन्नी महेद्रू की ओर से व्याख्यान दिया गया।
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प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने विजेता छात्रों को पुरस्कार वितरित किए और कहा कि एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है जो दुनियाभर में लाखों लोगों की जान ले रहा है। 1928 से पहले कोई एंटीबायोटिक्स नहीं थे, जब अलेक्जेेंंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन की खोज की और उसके बाद एंटीबायोटिक्स में बहुत प्रगति हुई और सभी संक्रामक रोग जैसे तपेदिक, टाइफाइड, हैजा, प्लेग, सिफलिस आदि इलाज योग्य हो गए थे। हालांकि, अब एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध बढ़ने की कई रिपोर्टें आ रही हैं जो एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बनने जा रहा है। प्राचार्य ने कहा कि एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध बढ़ने का मुख्य कारण एंटीबायोटिक दवाओं का अनुचित उपयोग है। प्राचार्य ने आगे कहा कि डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक्स नहीं लेनी चाहिए। प्रिंसिपल ने डॉक्टरों को सलाह दी कि वे एंटीबायोटिक्स विवेकपूर्ण और संयमित ढंग से लिखें।
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