महिलाओं को जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण देते हुए सीमा। स्रोत जागरूक पाठक
गलोड़ (हमीरपुर)। नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करना आसान नहीं होता, लेकिन बकारटी गांव की सीमा ने हिम्मत और मेहनत के दम पर यह कर दिखाया। निजी कंपनी में प्रशिक्षक के पद पर कार्य करने के बाद उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना।
आज वह खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ कई महिलाओं को भी रोजगार की राह दिखा रही हैं। सीमा पिछले दो वर्षों से महिलाओं को हैंडमेड ज्वेलरी और अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके प्रशिक्षण से कई महिलाएं घर बैठे अपना काम शुरू कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
वर्तमान में सीमा आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के माध्यम से भी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए तैयार कर रही हैं। सीमा बताती हैं कि नौकरी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि हुनर का सही उपयोग कर स्वरोजगार के माध्यम से बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है।
इसी सोच के साथ उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू किया। शुरुआत में कई चुनौतियां आईं, लेकिन मेहनत, धैर्य और गुणवत्ता के बल पर उनका काम आगे बढ़ता गया।
आज सीमा हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि महिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास की है।
सीमा का सपना है कि अधिक से अधिक महिलाएं अपने हुनर को पहचानें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। उनकी सफलता क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।