हमीरपुर। जिला में स्क्रब टायफस ने दस्तक दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने बीते रोज चिकित्सा खंड बड़सर से नौ सैंपल लिए थे, जिसमें से स्क्रब टायफस के चार पॉजिटिव मामले आए हैं। अब विभाग ने अन्य स्वास्थ्य खंडों में भी स्क्रब टायफस को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए हैं। वहीं, जरूरी दवाइयों जैसे एजिथ्रोमाइसिन और डोक्सीसाईक्लीन का आवश्यक स्टॉक सभी अस्पतालों में पहुंचा दिया गया है।
स्क्रब टायफस आमतौर पर बरसात के दिनों में अधिक फैलता है, लेकिन महिलाएं आजकल खेतों में खास कटाई का कार्य कर रही हैं। ऐसे में उस घास के अंदर जो कीटाणु हैं, उनके शरीर के संपर्क में आने से स्क्रब टायफस फैल रहा है। स्क्रब टाइफस के कारण व्यक्ति को बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द आदि होते हैं।
स्क्रब टाइफस मुख्य रूप से कुछ घुनों का परजीवी है, जिनमें से दो निकट संबंधी प्रजातियां हैं, लेप्टोट्रोम्बिडियम (ट्रॉम्बिकुला) अकामुशी और एल. डेलीएन्से, इस रोग के वाहक हैं। यह संक्रमण मनुष्यों में तब फैलता है जब घुन का लार्वा किसी व्यक्ति को काटता है। संक्रमित घुन द्वारा काटे जाने के लगभग 10 से 12 दिन बाद एक व्यक्ति स्क्रब टाइफस से बीमार पड़ जाता है।
काटने की जगह पर लाल या गुलाबी रंग का घाव दिखाई देता है और व्यक्ति को लिंफ ग्रंथियों में सूजन के साथ-साथ सिरदर्द, बुखार, ठंड और सामान्य दर्द का अनुभव होने लगता है। बुखार शुरू होने के लगभग एक सप्ताह बाद, धड़ की त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने विकसित हो जाते हैं और हाथ और पैरों तक फैल सकते हैं।
बुखार आने पर अस्पताल में करवाएं जांच
बीएमओ बड़सर डॉ. ब्रिजेश ने कहा कि स्क्रब टायफस के मामले आ रहे हैं। ऐसे में इससे बचाव के लिए जिनको भी बुखार हो रहा है वे समय पर अस्पताल में जाकर जांच करवाएं। वहीं, जो महिलाएं आजकल घास आदि काट रही हैं, वह मुंह ढककर, पैरों में जुराबें आदि डालकर जाएं। इससे स्क्रब टायफस होने से संभावनाएं कम हो जाएंगी।