अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट को हर निर्णय के लिए पृथ्वी से मिलने वाले निर्देश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थियों ने (एआई) कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नोवा सेट सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो सैटेलाइट में लगे रोवर से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर खुद निर्णय लेने में सक्षम होगा। मंगल ग्रह तक संदेश पहुंचने और जवाब आने में करीब 48 मिनट तक लग सकते हैं। ऐसे में भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर मानव मिशनों के दौरान यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
एनआईटी के कंप्यूटर विज्ञान और विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने यह नवाचार संस्थान में आयोजित आंतरिक स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन में प्रस्तुत किया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ चुना गया। अब राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन मूल्यांकन के बाद इसे स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को कंप्यूटर विज्ञान विभाग के विद्यार्थी पार्थ बंसल और विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की विद्यार्थी सृष्टि ठाकुर ने तैयार किया है।
विद्यार्थियों ने एआई आधारित एजेंट की मदद से सॉफ्टवेयर विकसित किया है। इसमें मंगल के वातावरण और सतह से जुड़े आंकड़ों को समझकर रोवर से प्राप्त इनपुट के आधार पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रदर्शित की गई है। विद्यार्थियों के अनुसार नोवा सेट को भविष्य में सैटेलाइट में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। परियोजना को और विकसित करने के साथ पेटेंट दाखिल करने की तैयारी भी की जा रही है।