प्रदेश पदोन्नत स्कूल प्रवक्ता संघ ने आए दिन नई अधिसूचना जारी कर कर्मचारियों के वेतन में कटौती के वित्त विभाग के निर्णयों पर गहरा खेद जताया है।
संघ के जिला प्रधान केवल ठाकुर, महामंत्री रविदास, प्रदेश उपाध्यक्ष यशवर जंबाल, हरिमन शर्मा ने बताया कि वर्तमान सरकार ने पंजाब के आधार पर कर्मचारियों को 4-9-14 का लाभ एक जनवरी, 2006 से देने का वायदा किया था, लेकिन 10 साल बाद भी यह लाभ प्रदेश के आईएएस, एचएएस एवं प्रथम श्रेणी के कुछ अधिकारियों को ही मिला है जो प्रदेश के कुल कर्मचारियों का मात्र दो फीसदी है।
शेष 98 फीसदी कर्मचारियों को यह लाभ 27 अगस्त, 2009 से नेशनल आधार पर दिया गया और आठ अगस्त, 2012 तक का वित्तीय लाभ वास्तव में कर्मचारियों को आज भी नहीं मिला।
वित्त विभाग ने 26 फरवरी, 2013 की अधिसूचना में एक अक्तूबर 2012 के बाद मिलने वाले एसीपी के लाभ को चार वर्ष तक स्थगित कर दिया। इसके बाद वित्त विभाग ने 7-7-2014 को एसीपी के लाभों में बड़ा बदलाव कर हुए इन लाभों को संपूर्ण सेवाकाल के लिए मात्र एक बार तक ही सीमित कर दिया जबकि पहले सेवाकाल के दौरान हरेक पद पर यह मिलता था। वित्त विभाग की कैंची यहीं नहीं रुकी, पदोन्नति पर मिलने वाले लाभ को भी इसमें शामिल कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि रही-सही कसर विभाग ने ग्रेड पे में पूरी कर दी। नए एवं पदोन्नत कर्मचारियों को नए ग्रेड पे लेने के लिए दो साल की शर्त का अड़ंगा लगा दिया जबकि 1968 के समझौते के अनुसार सरकार अपने कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर वेतनमान देने को बाध्य है।
पंजाब में ग्रेड पे से संबंधित ऐसी कोई शर्त नहीं है। अब जब पांच वर्ष बाद अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया गया तो उनके वेतन निर्धारण में न्यूनतम वेतनमान की शर्त जोड़ दी गई। इससे मई 2016 में अनुबंध से नियमित प्रवक्ता पीजीटी का वेतन 10300+4200 =14500 और जून 2015 में नियमित प्रवक्ता पीजीटी का वेतन 12090+4200=16290 निर्धारित हुआ।
इससे कर्मचारियों में भारी रोष है। संघ प्रदेश सरकार से मांग करता है कि एसीपी के बारे में 7-7-2014 की अधिसूचना रद्द की जाए। ग्रेड पे से दो वर्ष की शर्त हटाई जाए और कर्मचारियों को पंजाब पद्धति के आधार पर वेतनमान दिया जाए वरना प्रदेश पदोन्नत प्रवक्ता संघ संघर्ष की राह पर चलने को मजबूर होगा।