हमीरपुर। अनुसूचित वर्ग के रेशम कीट पालकों को शेड और प्लांटेशन के लिए मिलने वाली सहायता राशि समय पर उपलब्ध न होने के मामले में अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। जांच में पाया गया है कि योजना के क्रियान्वयन में देरी के कारण पात्र लाभार्थी लंबे समय तक लाभ से वंचित रहे।
जांच के अनुसार वर्ष 2017 में रेशम कीट पालन विभाग ने पांच अलग-अलग योजनाएं शुरू की थीं। इनमें अनुसूचित जाति वर्ग के 350 लोगों को शेड और प्लांटेशन के लिए 1.40 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जानी थी, लेकिन अधिकारियों ने योजना को धरातल पर लागू करने में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई।
बताया जा रहा है कि उस समय तैनात कई अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। मामला सामने आने के बाद रेशम कीट पालन विभाग ने दोबारा योजना का लाभ पात्र रेशम कीट पालकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
हमीरपुर जिले में भलवाणी क्लस्टर स्तर पर 350 पालकों को एक करोड़ 40 लाख रुपये की राशि दी जानी थी। पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिलने पर विभाग की ओर से तीन अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार बजट आवंटित न होने के कारण राशि वापस विभाग के पास चली गई थी। अब इसे दोबारा आवंटित किया जाएगा। इसके लिए पालकों के आवेदनों के सत्यापन की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है।
कोट :
2017 में एक साथ अलग-अलग योजनाएं शुरू की गई थीं। इस दौरान तैनात अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने का समय नजदीक था। इसके अलावा तैनात अधिकारी ऐसे थे, जिनकी पदोन्नति होनी थी। यह योजना अछूती रह गई, जिसके कारण योजना को लागू नहीं किया जा सका। अब इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
-बलदेव चौहान, उपनिदेशक, रेशम कीट पालन विभाग शिमला