सीमा पार से आने वाले छोटे ड्रोन हमलों को रोकने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइलों के बजाय अब कम लागत वाला इंटरसेप्टर ड्रोन विकल्प बन सकता है। एनआईटी हमीरपुर के तीन विद्यार्थियों ने महज दो लाख रुपये की लागत से ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो एआई तकनीक की मदद से हमलावर ड्रोन की पहचान कर उसका पीछा करेगा।
सीमा पार से आने वाले छोटे ड्रोन हमलों को रोकने के लिए करोड़ों रुपये की मिसाइलों के बजाय अब कम लागत वाला इंटरसेप्टर ड्रोन विकल्प बन सकता है। एनआईटी हमीरपुर के तीन विद्यार्थियों ने महज दो लाख रुपये की लागत से ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो एआई तकनीक की मदद से हमलावर ड्रोन की पहचान कर उसका पीछा करेगा। करीब एक फीट के हाथ में पकड़े जाने वाले लॉन्चर से इसे बटन दबाकर लॉन्च किया जा सकेगा।
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विद्यार्थियों के अनुसार इसकी रेंज दो किलोमीटर और अधिकतम रफ्तार 300 किलोमीटर प्रति घंटा है। स्टार्टअप स्काईरिन डायनामिक्स के तहत तैयार इस प्रोटोटाइप को एनआईटी में आयोजित शिक्षा महाकुंभ में प्रदर्शित किया गया। अब जैसलमेर में सेना के समक्ष इसका परीक्षण प्रस्तावित है। भौतिकी विज्ञान के सोमेश गुप्ता, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के एलविन सैणी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के संभव अग्रवाल ने मिलकर यह सिस्टम विकसित किया है। इसकी खासियत यह है कि इसे संचालित करने के लिए बड़े सेटअप या अधिक सैनिकों की जरूरत नहीं होगी। लॉन्चर और ड्रोन रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक से जुड़े हैं। लॉन्चर में लगा रिसीवर-ट्रांसमीटर ड्रोन में मौजूद एआई चिप को सक्रिय करेगा।
एआई से पहचान, पक्षियों और ड्रोन में करेगा अंतर
इस ड्रोन में 200 ग्राम बारूद होगा जोकि लक्ष्य को तबाह करेगा। इस सिस्टम में 4के कैमरे के साथ थर्मल और डेप्थ आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे पक्षियों और ड्रोन के बीच अंतर पहचानने तथा लक्ष्य पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
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डेढ़ लाख का ड्रोन, 50 हजार का लॉन्चर
विद्यार्थियों ने इंटरसेप्टर ड्रोन की लागत करीब डेढ़ लाख रुपये और लॉन्चर की 50 हजार रुपये रखी है। ऐसे में पूरा सिस्टम दो लाख रुपये में तैयार किया गया है।