शीतला माता की जयंती पर झांकी निकालते कलाकार।
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गारली (हमीरपुर)। उपमंडल बड़सर के वाहिना गांव में स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में रविवार को शीतला माता की जयंती के उपलक्ष्य पर निकटवर्ती गांवों में झांकियां निकाली गईं। 16 मार्च को माता का भंडारा किया जाना है। मान्यता है कि भंडारे के 1 दिन पहले रात को माता के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है और अगली सुबह 7 बजे वही प्रसाद का माता को भोग लगाया जाता है। इसके बाद दिनभर भंडारा चलेगा।
मंदिर का इतिहास मुगल साम्राज्य के समय का है। बड़सर की ग्राम पंचायत गारली के गांव वाहिना में प्राचीन शीतला माता मंदिर है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर कमेटी प्रधान हंसराज, राजेंद्र कुमार, अशोक कुमार, केशव दत्त शर्मा, कमलजीत, रमन कुमार, बंशी आदि ने बताया कि बात अकबर बादशाह के समय की है। एक बार महाराजा रणजीत सिंह कांगड़ा के बज्रेश्वरी मंदिर आए। उन्हें मंदिर में तीन मूर्तियां भेंट करने की इच्छा हुई। मूर्तियां बिलासपुर जिला के बछरेटू में बनाई गई थीं। पालकी की सहायता से इन्हें ले जाया जा रहा था।
इतने में मूर्तियां उठाने वालों ने जैसे ही आराम करने के लिए वाहिना में मूर्तियां उतारीं तो इनमें से एक मूर्ति इतनी भारी हो गयी थी कि जिसे उठाया नहीं जा सका था। महाराजा के आदेश पर मूर्ति को वहीं स्थापित करना पड़ा और महाराजा रणजीत सिंह के आदेश अनुसार मंदिर का निर्माण करवाया गया था। यह मंदिर आज शीतला माता के नाम से प्रसिद्ध है। उस समय वाहिना गांव के एक पोस्ट मास्टर पद से रिटायर्ड साधु राम ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। यहां पर नवरात्रों में माता की विशेष पूजा की जाती है और भागवत कथा का भी आयोजन हर वर्ष किया जाता है।