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Hamirpur (Himachal) News: नौ साल नौकरी से रहीं वंचित, अब नियमित होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो गईं राज कुमारी

Fri, 30 Jan 2026 12:51 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
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हमीरपुर। नौ साल तक नौकरी से वंचित रखी गई एक गरीब महिला को आखिरकार न्याय मिला है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पौहंज पंचायत की तत्कालीन प्रधान को आदेश दिए हैं कि वह पीड़िता को दो लाख रुपये बकाया राशि व्यक्तिगत तौर पर अदा करें।
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कोर्ट ने साफ कहा है कि पंचायत स्तर पर बरती गई लापरवाही और मनमानी के चलते महिला को न सिर्फ नौकरी मिलने में देरी हुई, बल्कि वह नियमित होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो गईं।
मामला जिला हमीरपुर की पौहंज पंचायत का है। यहां वर्ष 2006 में सुआणा गांव निवासी राज कुमारी पत्नी दिवंगत रमेश चंद को शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल में जलवाहक (वाटर कैरियर) पद पर तैनाती दी गई थी। राज कुमारी सभी शर्तें पूरी करती थीं। पति के निधन के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी।
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नियमानुसार ज्वाइनिंग के लिए पंचायत प्रधान की अनुमति जरूरी थी, लेकिन आरोप है कि प्रधान ने ऑफर लेटर पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे ज्वाइनिंग अटक गई। मजबूरी में राज कुमारी ने कर्ज लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने वर्ष 2015 में उन्हें जलवाहक पद पर तैनाती दिलाई, लेकिन तब तक नौ साल बीत चुके थे।
देर से नौकरी मिलने के कारण राज कुमारी 11 साल की सेवा पूरी नहीं कर पाईं, जिसके चलते उन्हें 31 दिसंबर को दिहाड़ीदार के रूप में ही सेवानिवृत्त होना पड़ा और नियमित होने से जुड़े तमाम लाभों से वंचित रहना पड़ा। इसके बाद राज कुमारी ने दोबारा कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने 2022-23 में स्पष्ट आदेश दिए कि जिन नौ वर्षों की सेवा पंचायत की गलती से नहीं मिल पाई, उसका मुआवजा प्रधान को व्यक्तिगत रूप से दो लाख रुपये के रूप में देना होगा।
हाल ही में आरोपी प्रधान की अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। राज कुमारी ने कहा कि साढ़े दस साल सेवा दी, लेकिन नियमित होने से पहले ही सेवानिवृत्त हो गईं। उन्होंने कहा कि जब हर दरवाजा बंद हो गया, तब कोर्ट ही सहारा बना।
वहीं, कोर्ट के आदेशों के बावजूद अभी तक दो लाख रुपये नहीं मिले हैं। अगर 2006 में ज्वाइनिंग हो जाती तो न केवल वे नियमित होकर रिटायर होतीं, बल्कि बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दिला पातीं।
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कोट
मामला मेरे संज्ञान में है। वर्ष 2006 में मैं मातृत्व अवकाश पर थी और उस समय पंचायत का चार्ज उपप्रधान के पास था।
-रीना सिपहिया, पंचायत प्रधान, पौहंज
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