हमीरपुर। जिले में मंगलवार को इक्का दुक्का निजी बस ऑपरेटरों ने बसें तो चलाईं, लेकिन उन्हें यूनियन के विरोध का सामना करना पड़ा। यूनियन की मनाही के बावजूद कुछेक ऑपरेटरों ने रूटों पर निजी बसें भेज दीं। जिसका पता जब यूनियन को लगा तो संबंधित बस संचालक को बसें न चलाने को कहा गया। निजी बस ऑपरेटर यूनियन हमीरपुर के उपाध्यक्ष विजय ठाकुर ने कहा कि 25 जून को होने वाली कैबिनेट की बैठक के बाद ही बसें चलाने के बारे में निर्णय लेंगे। अगर सरकार निजी बस ऑपरेटरों की मांगों को मानती है तो बसें चलेंगी नहीं तो निजी बसों के पहिये थमे रहेंगे। घाटा सहने की बजाय यही अच्छा होगा कि बसें न चलें। विजय ने कहा कि अब तो पेट्रोल के दाम भी बढ़ गए हैं तो ऑपरेटरों पर और भी खर्चे का भार पड़ेगा।
उधर, निजी बसें न चलने से लोगों को आवाजाही में भी परेशानी हो रही है। सरकारी बसों में सामाजिक दूरी के नियम का पालन करवाया जा रहा है और सीटों की संख्या से कम ही सवारियां जा रही हैं। इसलिए निजी बसों की भी रूटों पर जरूरत पड़ रही है। उधर, ब्यास निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान भीम सिंह रांगड़ा ने कहा कि जो इक्का दुक्का बसें चलीं थी, उनके ऑपरेटरों से बात कर ली गई है। बुधवार से वह बसें रूटों पर नहीं भेजेंगे। जब तक सरकार निजी बस ऑपरेटरों की मांगों को नहीं मानती है, तब तक बसें नहीं चलेंगी।