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छात्रों का कमाल: मलबे में दबी इंसानी सांसों की आहट बताएगा प्रहरी रोबोट, थ्रीडी मैप से खोजेगा सुरक्षित रास्ता

Mon, 12 Oct 2026 11:51 AM IST
Ankesh Dogra बवीता चंदेल, हमीरपुर।

सार

भूस्खलन और अन्य आपदाओं के दौरान मलबे में दबे लोगों की तलाश को आसान बनाने के लिए शिमला के दो विद्यार्थियों ने प्रहरी रोबोट का प्रारूप तैयार किया है। करीब 12 हजार रुपये की लागत वाले इस मॉडल में सेंसर, कैमरा और थ्रीडी मैपिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। रोबोट के जरिये पांच किलो तक खाद्य सामग्री और चिकित्सा किट पहुंचाने की सुविधा भी विकसित की गई है।
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छात्रों ने बनाया प्रहरी रोबोट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भूस्खलन के बाद मलबे में जिंदगी की तलाश और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित रेस्क्यू की चुनौती को तकनीक से आसान बनाने की पहल हुई है। मलबे में दबे लोगों की मौजूदगी और उनकी लोकेशन का पता लगाने से लेकर उन तक राहत सामग्री पहुंचाने में अब प्रहरी रोबोट मददगार बन सकता है।

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शिमला के सरस्वती विद्या मंदिर हिम रश्मि, विकासनगर के जमा एक के छात्र अभय पंवार और दिशांत सूरमा ने इस स्मार्ट आपदा-प्रतिक्रिया रोबोटिक सिस्टम का प्रोटोटाइप तैयार किया है। एनआईटी हमीरपुर में आयोजित शिक्षा महाकुंभ 6.0 में इस नवाचार को प्रदर्शित किया गया। इसकी मदद से घटनास्थल का थ्रीडी मैप तैयार कर रेस्क्यू टीम तक भेजा जा सकेगा। करीब 12 हजार रुपये से तैयार इस मॉडल का उद्देश्य आपदा के दौरान बचाव कार्य को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। 
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प्रहरी रोबोट में आधुनिक सेंसर, कैमरा आधारित पहचान और स्मार्ट कंप्यूटिंग प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से घटनास्थल का थ्रीडी मैप तैयार कर बचाव दल को लाइव भेजने की व्यवस्था है। मिलीमीटर वेव सेंसर मलबे में दबे लोगों की मौजूदगी और उनकी लोकेशन का पता लगाने में मदद करेगा। इससे रेस्क्यू टीम को घटनास्थल की स्थिति समझने, सुरक्षित रास्ता तय करने और मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।

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इस रोबोट की खासियत सिर्फ मलबे में लोगों की तलाश तक सीमित नहीं है। इसके जरिये एक बार में पांच किलो तक खाद्य सामग्री और मेडिकल किट पहुंचाने की सुविधा भी विकसित की गई है। छात्रों के अनुसार, इसका मॉडल जमीन के 20 मीटर नीचे और दीवार के 20 मीटर आर-पार तलाश करने की क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। हालांकि, इन क्षमताओं की व्यावहारिक पुष्टि और वास्तविक आपदा परिस्थितियों में परीक्षण के बाद ही इसकी उपयोगिता का आकलन किया जा सकेगा।

छात्र अभय पंवार व दिशांत सूरमा ने बताया कि इस नवाचार को आगे विकसित करने के लिए फंडिंग मिलती है तो वह ऐसे पांच और रोबोट तैयार करेंगे। ये आपस में समन्वय बनाकर टीम के साथ मिलकर कार्य करेंगे और टीम के पास पूरा डेटा भेजेंगे। इससे आपदा में मदद मिल सकेगी।

प्रहरी मॉडल विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और जनसुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। यह पहल नवाचार आधारित शिक्षा और समाजोपयोगी तकनीकी समाधान विकसित करने का प्रयास है।  - हितेश शर्मा, गाइड शिक्षक, सरस्वती विद्या मंदिर हिम रश्मि, विकासनगर, शिमला
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