हमीरपुर। अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ ग्रुप-सी हमीरपुर ने वर्चुअल बैठक में हिमाचल सरकार की प्राथमिकता पर कोविड वैक्सीन लगाने की अधिसूचना में डाक कर्मचारियों को शामिल नहीं करने पर रोष जताया है।
संघ ने कहा कि डाक कर्मचारी सीधे तौर से लोगों की सेवा से जुड़ा है और पिछले सवा साल जब से कोरोना महामारी ने कहर शुरू हुआ है, डाक कर्मचारी लगातार अपनी सेवाएं देश और प्रदेश के लोगों को दे रहा है।
अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ ग्रुप-सी हमीरपुर के मंडलीय सचिव राज कुमार शर्मा ने कहा कि हिमाचल सरकार ने इस सूची में सभी बैंक कर्मियों को शामिल किया है, लेकिन डाक कर्मचारियों को भूल गए। जबकि बैंक तथा डाक कर्मचारी देश और प्रदेश के लोगों को एक जैसी वित्तीय सेवाएं देते आ रहे हैं। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के कर्मचारी इस सूची में शामिल होंगे, जबकि यह कर्मचारी तथा डाक कर्मचारी एक ही छत के नीचे साथ बैठकर लोगों को सेवाएं दे रहे हैं।
हिमाचल के सभी डाकघरों के पोस्टमैन इस महामारी में प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई वृद्धावस्था पेंशन और अन्य सामाजिक पेंशन का वितरण घर द्वार पर कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त लोगों को इस महामारी में जीवनदायिनी दवाइयों का वितरण और अन्य डाक वस्तुओं का वितरण बिना ब्रेक के घर द्वार पर कर रहे हैं। पिछले वर्ष जब यह महामारी आई उस वक्त जिला प्रशासन ने डाक कर्मचारियों को प्रदेश में, विदेशों से आए लोगों की पहचान करने और बीमारी की पहचान के सिमटम वाले लोगों की पहचान करने के सर्वे का काम दिया था। जिसे डाक कर्मचारियों ने बखूबी निभाया। जब प्राथमिकता सूची की बारी आई तो डाक कर्मचारी प्रदेश सरकार को दूर-दूर तक नजर नहीं आया । इस बात पर चिंतन किया गया कि भले ही डाक विभाग केंद्रीय कर्मचारी हैं। परंतु वे इसी प्रदेश के वासी होने के साथ-साथ इसी प्रदेश के लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अत: प्रदेश के हजारों डाक कर्मचारी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से निवेदन करते हैं कि प्रदेश के डाक कर्मचारियों को वह न्याय और सम्मान मिले जो इस प्रदेश के अन्य फ्रंटलाइन कोविड वॉरियर को मिल रहा है।