हमीरपुर। मुंह की स्वच्छता में लापरवाही और तंबाकू का प्रयोग दांतों पर दाग छोड़ रहा है। बच्चे चाॅकलेट, टॉफी, जैली आदि खाने के बाद दांतों की सफाई अच्छे से नहीं कर रहे हैं। इससे दांतों में कीड़ा लग रहा है।
वहीं, तंबाकू प्रयोग करने वाले लोगों के दांतों पर काले धब्बे पड़ रहे हैं। गलोड़ अस्पताल में बीते तीन महीनों में करीब 48 मरीज ऐसे आए हैं, जिनके दांतों में काले धब्बे और कीड़ा लगा है। अस्पताल में दांतों की समस्याओं से संबंधित करीब 131 लोगों की ओपीडी रही। इसमें सितंबर में 54, अक्तूबर में 42 और नवंबर में 35 मरीज आए।
चिकित्सकों ने लोगों के दांतों की जांच की। इसमें लगभग 48 लोगों के दांतों में काले धब्बे और कीड़ा लगा हुआ था। कुछ लोग दांतों की अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे। इनमें 0-10 आयु वर्ग में एक, 10-20 आयु वर्ग में 15, 20-50 आयु वर्ग में 29 और 50-75 आयु वर्ग के चार लोग शामिल हैं।
चाॅकलेट, टॉफी आदि के सूक्ष्म कण दांत में चिपक जाते हैं। कुछ समय बाद दांतों में कीड़ा लगना शुरू हो जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे दांत खराब हो जाते हैं। बच्चों को सुबह-शाम ब्रश कराना जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर रात में बैक्टीरिया व कीटाणुओं को पनपने का मौका मिलता है। इससे दांत में कीड़े लगने से वह खोखले होने लगते हैं।
दांतों में कैविटी ज्यादा गहरी हो जाने पर रूट कैनाल कराने की भी जरूरत पड़ जाती है। वक्त पर इलाज नहीं कराने पर बच्चों के दांत सही नहीं निकलते। इसके साथ ही दांतों में भीषण दर्द भी होता है।
तंबाकू और गुटखा दोनों के सेवन पर भी दांतों पर कालापन जमा होता है। दांतों पर पड़े ये निशान देखने में तो बुरे लगते ही हैं। इन्हें हटाना भी आसान नहीं होता। संवाद