हमीरपुर। कोरोना वायरस के डर के चलते लोग बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को अपने घरों में घुसने नहीं दे रहे। जिससे न तो बिजली मीटर की रीडिंग चेक हो पा रही है और न ही बिजली बिलों का वितरण हो पा रहा है। इससे बिजली बोर्ड को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का तर्क है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों के घर-घर जाने से वह कई लोगों के संपर्क में आते हैं, जिसके चलते कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसके चलते कई लोग बिजली बिल लेने से इंकार कर रहे हैं। वहीं, कोरोना के मामले सामने आने के कारण कई गांव और लोगों के घरों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है। जिसके चलते बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी बिजली खपत का पता लगाने के लिए मीटर रीडिंग जांचने में भी परेशानी आ रही है।
बिजली बोर्ड ने अब सभी उपभोक्ताओं को अनुमानित बिजली बिल वितरित करने का निर्णय लिया है लेकिन, लोगों के बिल को छूने से इंकार करने से बिजली बोर्ड की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। हालांकि बिजली बोर्ड ने अपने उपभोक्ताओं से ऑनलाइन सेल्फ जनरेटेड बिल की अपील भी की है। लेकिन, हमीरपुर जिला के ग्रामीण इलाकों में खुद बिल जनरेट करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व में भी जिले में 60 फीसदी से अधिक लोग खुद कैश काउंटर पर जाकर बिजली बिल जमा करवाते रहे हैं।
अब कैश काउंटर और लोकमित्र केंद्र बंद होने से बिजली बिल जमा नहीं हो रहे। सबसे अधिक परेशानी कोरोना कर्फ्यू के कारण बंद दुकानों, होटल, रेस्टोरेंट और निजी शिक्षण संस्थानों और साइबर कैफे संचालकों को पेश आ रही हैं, जिन्हें अभी तक बिजली बिल नहीं मिले हैं। अगर कुछ दिनों के बाद स्थिति सामान्य होती है तो इन्हें एक साथ कई महीनों का बिल एक साथ देना पड़ेगा।
उधर, बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता केके भारद्वाज ने कहा कि सुजानपुर समेत कुछ क्षेत्रों में बिजली वितरण करने वाले बोर्ड के कर्मचारियों को लोगों ने अपने घरों में घुसने नहीं दिया। मीटर रीडिंग न होने के कारण अनुमानित बिजली बिल दिए जा रहे हैं। बिजली बिलों का भुगतान न करने से बोर्ड को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, कई लोग ऑनलाइन भुगतान भी कर रहे हैं।