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संशोधित पेंशन के लाभ जारी नहीं करने पर आक्रोश

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हमीरपुर। हिम आंचल पेंशनर्स संघ के संस्थापक बीडी शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष योगराज शर्मा और जिला प्रधान केसी गौतम ने कहा कि प्रदेश के पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशन धारकों को केंद्रीय सिविल सेवा पेंशन नियमावली 1972 के अंतर्गत पेंशन के लाभ देय हैं। केंद्र सरकार की ओर से अपने पेंशनरों को 1-1-2016 से संशोधित आधार पर पेंशन में बढ़ोतरी प्रदान की जा चुकी है। प्रदेश के पेंशनर्स केंद्रीय पेंशन नियमों से संबंधित हैं, इसलिए पेंशनरों में सरकार के प्रति भारी रोष है कि सरकार उन्हें इतना समय गुजर जाने पर भी संशोधित पेंशन के लाभ जारी नहीं कर रही है।
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संघ ने कहा कि 2017 के चुनावों के दौरान सत्ताधारी दल ने आश्वासन दिया था कि सत्ता में आने पर पेंशनरों की मांगों को माना जाएगा, लेकिन इस बारे में भी सरकार ने उदासीन रवैया अपनाए हुआ है। पेेंशनरों को 65, 70 और 75 वर्ष आयु के बाद मिलने वाले 5, 10 और 15 फीसदी पेंशन भत्ते को मूल पेंशन में बदला जाए, दो वर्ष के अंतराल में एक मूल पेंशन के बराबर तीर्थयात्रा भत्ता प्रदान किया जाए, चिकित्सा भत्ता एक हजार मासिक हो, 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन की बहाली, पेंशनरों के विभागों में वर्षों से लंबित चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान आदि मांगें संघ वर्षों से करता आ रहा है, लेकिन सरकार इनके प्रति उदासीन ही है। संघ ने कहा कि विधायक अपने वेतन-भत्तों को थोड़े-थोड़े अंतराल में 60 फीसदी से भी अधिक बढ़ाने जाने पर भी संतुष्ट नहीं हैं, परंतु पेंशनरों, वरिष्ठ नागरिकों की ओर से अपने इलाज पर जेब से खर्च की राशि के चिकित्सा बिलों की सालों तक अदायगी न हो पाना वरिष्ठ नागरिकों के साथ अन्याय है। सरकार के प्रति पेंशनरों में यह भी आक्रोश है कि सरकार पेंशनरों की जेसीसी का पुनर्गठन कर बैठक बुलाने में असमर्थ रही है। संघ ने सरकार से मांग की है कि जेसीसी का पुनर्गठन करते हुए इसकी बैठक शीघ्र बुलाई जाए, ताकि पेंशनरों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा कर उनका निवारण किया जा सके।
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