एडमिशन के नाम पर निजी स्कूलों में लूट जारी है। प्रत्येक कक्षा में दाखिले के नाम पर पांच से आठ हजार रुपये एडमिशन फीस वसूली जा रही है। ऐसे में शिक्षा के अधिकार अधिनियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कई स्कूलों में तो तीन से छह माह की अतिरिक्त मासिक फीस और बस किराया भी वसूला जा रहा है।
निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अभिभावक प्रवीण कुमार, नीरज कुमार, सुनील कुमार, सुभाष चंद का कहना है कि निजी स्कूलों में एडमिशन फीस के नाम पर सरेआम लूट की जा रही है। प्रत्येक कक्षा में दाखिले के नाम पर पांच से आठ हजार रुपये वसूले जा रहे हैं।
एडवांस फीस और बस किराया जमा न करने पर बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिया जा रहा है। आरटीई का हवाला देने पर स्कूल प्रबंधन दाखिला देने से इंकार कर रहा है। यहां तक कि दूसरे निजी स्कूल में दाखिला लेने की सलाह दे रहे हैं।
वर्दी और स्पोर्ट्स फंड में भी गोलमाल
निजी स्कूलों में वर्दी और स्पोर्ट्स फंड के नाम पर भी गोलमाल हो रहा है। वर्दी दो से तीन हजार रुपये में दी जा रही है। स्पोर्ट्स फंड के नाम पर दो से तीन हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। प्राइमरी बिंग में स्पोर्ट्स फंड की जगह एनुअल एक्टिविटी चार्ज के नाम पर पांच हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
अगर निजी स्कूलों में ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। लिखित शिकायत आने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- सोमदत्त सांख्यान, उच्च शिक्षा उपनिदेशक, हमीरपुर