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अस्पतालों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों ने मांगा रेगुलर के बराबर वेतन

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हमीरपुर। डॉक्टर राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आउटसोर्स पर तैनात स्पोर्टिंग स्टाफ ने भी इस आपात स्थिति में प्रदेश सरकार से नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और अन्य सुविधाएं देने की मांग की है। आउटसोर्स कंपनी की ओर से हेल्थ स्टाफ की तैनाती की गई है। लेकिन, कर्मचारियों को 7 से आठ हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है। कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए हालात में कई राज्य सरकारों ने स्वास्थ्य विभाग में तैनात कर्मचारियों का वेतन दोगुना कर दिया है। हालांकि, हिमाचल में ऐसा कुछ नहीं। स्पोर्टिंग स्टाफ ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि उनका वेतन भी नियमित कर्मचारियों के बराबर किया जाए। विपदा की इस घड़ी में यह कर्मचारी भी अपनी भूमिका बेहतर ढंग से निभा रहे हैं।
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नियमित कर्मचारियों की तरह ही आउटसोर्स पर तैनात स्पोर्टिंग स्टाफ के सदस्य भी बखूबी अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे हैं। बात डॉक्टर राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर की करें तो यहां भी करीब चार दर्जन कर्मचारी स्पोर्टिंग स्टाफ में आते हैं। यह लोग भी इस महामारी से निपटने में नियमित कर्मचारियों के बराबर हिस्सेदारी निभा रहे हैं। इन कर्मचारियों की तैनाती यहां एक निजी कंपनी ने की है। कर्मचारी निजी कंपनी ने रखे हैं। इस कारण कोई सामने आकर आवाज नहीं उठा रहा। हालांकि, यह सभी कर्मचारी यही चाहते हैं कि इन्हें भी इस विपदा की घड़ी में नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन मिले ताकि, वह अपने परिवार का भरण पोषण सही से कर पाएं। स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की मांग कई विधायक भी कर चुके हैं। इनका भी यही कहना था कि मुसीबत से लड़ रहे स्वास्थ्य महकमे के कर्मचारियों को हर सुविधा मिलनी चाहिए। जाहिर है कि मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में कोरोना पीड़ितों का इलाज संभव है। वहीं, चैरिटेबल अस्पताल कोटा सेकेंडरी हॉस्पिटल को कोविड-19 बनाया गया है। यहां पर तीन कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। बड़ी वैश्विक महामारी के रूप में सामने आए इस वायरस का सामना स्वास्थ्य विभाग के रेगुलर कर्मचारियों के साथ स्पोर्टिंग स्टाफ भी कर रहा है।
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