हमीरपुर। जिले के तीन सरकारी स्कूलों में जर्जर हो चुके पुराने भवनों को अब नष्ट किया जाएगा। विद्यार्थियों और अध्यापकों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग ने भवनों को गिराने का निर्णय लिया है, ताकि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो।
पुराने भवनों में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला परोल, डिडवीं और बटराल के कक्षा कक्ष शामिल हैं। स्कूलों में इन कक्षा कक्षों का निर्माण कार्य वर्षों पूर्व हुआ है और उनकी स्थिति मरम्मत के योग्य नहीं बची है। ऐसे में स्कूल प्रमुखों ने उच्च शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय में भवनों को गिराने के लिए प्रपोजल भेजी थी, ताकि वार्षिक परीक्षाओं के उपरांत भवन को गिराने का कार्य शुरू हो सके। अब उपनिदेशक कार्यालय से कमेटी स्कूलों में जाकर सर्वे करेगी, जिसके उपरांत ही आगामी प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
वर्तमान में जिलेभर के कुछेक स्कूलों में भवन काफी पुराने हो चुके हैं और बरसात के दौरान भूस्खलन आदि की घटनाएं बढ़ने से भवनों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग की ओर से लगातार स्कूल भवनों की रिपोर्ट मंगवाई जा रही है, ताकि स्कूल स्तर पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
पुराने भवनों को गिराने के बाद ही स्कूल में विद्यार्थियों के लिए नए भवनों का निर्माण कार्य हो सकेगा। इससे पूर्व भी बरसात के दौरान 10 स्कूलों में पुराने भवनों की पुरानी छत्तें, चहारदीवारी, शौचालय क्षतिग्रस्त हुए हैं। अब भवनों के डिस्मेंटल होने से आपदा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
कोट
विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों से प्रत्येक सप्ताह पुराने भवनों का डाटा मंगवाया जा रहा है। तीन स्कूलों में भवन बहुत ही जर्जर स्थिति में हैं, जिन्हें डिस्मेंटल करने के लिए प्रपोजल निदेशालय भेज दी गई हैं। मंजूरी मिलते ही भवनों को गिराने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-डॉ. एमआर चौहान, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, हमीरपुर