आपदा प्रबंधन कार्यशाला को संबोधित करतीं सहायक आयुक्त अपराजिता चंदेल। -स्रोत : आयोजक
हमीरपुर। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के सहयोग से मंगलवार को होटल हमीर में तीन दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। इस कार्यशाला में विभिन्न डिग्री कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों, लोक निर्माण, जलशक्ति, ग्रामीण विकास सहित अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी और मास्टर ट्रेनर भाग ले रहे हैं।
इसमें ब्रिटेन के बर्मिंघम स्थित एस्टन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीक से शेल्टर बनाने का गुरु सिखाएंगे। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए सहायक आयुक्त अपराजिता चंदेल ने कहा कि आपदा से निपटने के लिए अगर पहले से अच्छी तरह से योजना बनाई जाए तो आपदा के दौरान नुकसान को कम किया जा सकता है। बचाव और राहत कार्य बेहतर तरीके से किए जा सकते हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों और मास्टर ट्रेनरों से आह्वान किया कि वे इस कार्यशाला के बाद इस तकनीक को अपने-अपने क्षेत्रों में लागू करने के लिए अन्य अधिकारियों को भी प्रशिक्षित करें।
केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के पर्यावरण विभाग के डीन प्रो. दीपक पंत ने कहा कि पर्यावरण से संबंधित समस्याओं पर जागरुकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। यदि हम पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाएंगे तो आपदाओं को भी कम किया जा सकता है। कार्यशाला के तकनीकी सत्र में एस्टन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों डॉ. कोमल राज आर्यन और डॉ. यी-चुंग लियू ने प्रतिभागियों को आपदा के बाद अस्थायी शेल्टर बनाने की आधुनिक तकनीक से अवगत करवाया।
इससे पहले डीडीएमए के जिला इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के प्रभारी भानु शर्मा ने उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि, सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर डीडीएमए की प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण अधिकारी समीक्षा शर्मा और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।